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Chhattisgarh Ka Mausam: बलरामपुर और सरगुजा में हुई सबसे ज्यादा बारिश, यहां सबसे कम, जानें आज कैसा रहेगा मौसम?

Chhattisgarh Ka Mausam: बलरामपुर और सरगुजा में हुई सबसे ज्यादा बारिश, यहां सबसे कम, जानें आज कैसा रहेगा मौसम?
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Chhattisgarh Ka Mausam: उत्तरी झारखंड, दक्षिण-पश्चिमी बिहार और दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर बने स्पष्ट निम्न दबाव के क्षेत्र के कारण छत्तीसगढ़ में मानसूनी बारिश का दौर तेज हो गया है। बुधवार को मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में सरगुजा संभाग और राज्य के उत्तरी-मध्य भागों में मूसलाधार बारिश दर्ज की गई है। बलरामपुर जिले के कुसमी में सर्वाधिक 29 सेंटीमीटर बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। मौसम विभाग ने आगामी 24 घंटे तक रायपुर, बिलासपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में भारी वर्षा और गरज-चमक के साथ वज्रपात का अलर्ट जारी करते हुए सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

प्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान हुई वर्षा के आंकड़े डराने वाले हैं। सरगुजा और बलरामपुर जिलों में बारिश ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। बलरामपुर के कुसमी में 29 सेंटीमीटर, चांदो में 14, डौराकोचली में 13, सामरी में 12 तथा रघुनाथनगर व रामानुजगंज में 11-11 सेंटीमीटर वर्षा दर्ज की गई। शंकरगढ़ में 10, वाड्रफनगर में 9 और अंबिकापुर में 8 सेंटीमीटर पानी गिरा। वहीं राजधानी रायपुर में 7 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई। राजधानी में बादलों और बारिश के कारण अधिकतम तापमान सामान्य से 2.8 डिग्री गिरकर 27.3 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है, जिससे हवा में ठंडक घुल गई है।

क्यों हो रही बारिश ?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पड़ोसी राज्यों के वायुमंडल में बने अवदाब (Depression) और चक्रवातीय परिसंचरण ने छत्तीसगढ़ के उत्तरी हिस्सों को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया है। आमतौर पर अगस्त के मध्य में बंगाल की खाड़ी और मध्य भारत में बनने वाले ऐसे सिस्टम भारी तबाही लाते हैं। इससे पहले भी मानसून सत्र के दौरान जब-जब झारखंड और बिहार सीमा पर निम्न दबाव का क्षेत्र बना है, सरगुजा संभाग में रिकॉर्डतोड़ वर्षा देखने को मिली है। इस बार भी मानसूनी ट्रफ रेखा के प्रभाव से निचले इलाकों में पानी भरने की स्थिति पैदा हो रही है।

मौसम विभाग की चेतावनी और प्रशासनिक अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले तीन दिनों तक प्रदेश के एक-दो स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा और बिजली गिरने की आशंका बनी हुई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 20 अगस्त के बाद से बारिश की तीव्रता में धीरे-धीरे कमी आएगी, लेकिन तब तक हल्की से मध्यम बौछारें पड़ती रहेंगी। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों को मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं। नदी-नालों के पास रहने वाले लोगों और किसानों को विशेष रूप से सतर्क रहने तथा आकाशीय बिजली चमकने के दौरान खुले में न जाने की हिदायत दी गई है।

आम जनजीवन और खेती-किसानी पर असर
इस लगातार बारिश का सबसे ज्यादा असर राज्य के ग्रामीण इलाकों और कृषि क्षेत्र पर देखने को मिल रहा है। धान की फसलों के लिए जहां यह बारिश संजीवनी मानी जा रही है, वहीं बलरामपुर और सरगुजा के निचले इलाकों में खेतों में अत्यधिक पानी भरने से फसलों को नुकसान की भी आशंका है। पहाड़ी नदी-नाले उफान पर होने से कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालयों से टूट गया है। राजधानी रायपुर समेत अन्य शहरों में निचले इलाकों में जलभराव की समस्या खड़ी हो गई है, जिससे यातायात और दैनिक आवाजाही प्रभावित हो रही है।

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