Tamilnadu Election: पिछले 27 सालों का टूटा रिकॉर्ड… मंदा पड़ा धंधा! ‘फूंक-फूंक’ बिरयानी खा रहे कैंडिडेट, अब खाने पर भी है चुनाव आयोग की नजर

Tamilnadu Election: पिछले 27 सालों का टूटा रिकॉर्ड… मंदा पड़ा धंधा! ‘फूंक-फूंक’ बिरयानी खा रहे कैंडिडेट, अब खाने पर भी है चुनाव आयोग की नजर
Image Source- Google

टीआरपी डेस्क। तमिलनाडु चुनाव में बिरयानी का रोल बहुत बड़ा माना जाता है। चुनाव के दौरान इसकी मांग और बढ़ जाती है क्योंकि नेता से लेकर कार्यकर्ता तक बिरयानी का स्वाद लेते हैं और चुनावी प्रचार में अपनी पूरी ऊर्जा झोंक देते हैं। मगर इस बारे यह मामला थोड़ा टाइट है।

वजह ये कि चुनाव आयोग ने कैंडिडेट के एक-एक खर्चे पर निगाह लगाई है। यहां तक कि उम्मीदवार चुनाव के दौरान खाने-पीने पर कितना पैसा उड़ाते हैं, उसका भी हिसाब होगा। लिहाजा बिरयानी पर लाखों रुपये होने वाला खर्च इस बार चुनाव आयोग के रडार पर है। जिसके कारण नेताओं ने बिरायनी पर खर्च घटा दिए हैं। नतीजतन, तमिलनाडु में इस बार के चुनाव में बिरयानी का बाजार मंदा है।

20 साल में ऐसा दिन नहीं देखा

बिरयानी का तमिलनाडु में चलन देखें तो यह 20 साल पुराना सफर है। तमिलनाडु में एक पुराना प्रचलन है कैंडिडेट को पार्टी के कैडर से रूबरू कराने का। मौका एक तरह से मिलन का होता है, इसलिए माहौल पूरा जलसे जैसा होता है। जलसे में खाने का उत्तम प्रबंध होता है और इसमें बिरयानी ने प्रमुख स्थान पाई है। कुछ धनाढ्य उम्मीदवार तो पूरे चुनाव प्रचार में जमकर बिरयानी बांटते हैं और माहौल अपने पक्ष में कराते हैं।

कोई नहीं दे रहा बिरयानी का ऑर्डर

होटल और प्राइवेट कैटरर्स की मानें तो बिरयानी के बिजनेस को इस बार बड़ा धक्का लगा है। इनका कहना है कि पिछले 10 साल का ट्रेंड देखें तो हर दिन 300-500 पैकेट बिरयानी की बिक्री हो जाती थी। इस बार हालत यह है कि किसी भी बड़ी पार्टी की तरफ से एक भी बड़ा ऑर्डर नहीं मिला है।

वेल्लोर के एक और बिरयानी बिजनेसमैन के मुताबिक, चुनाव अधिकारियों ने बिरयानी का बिजनेस करने वालों से कहा है कि वैसे नेताओं की जानकारी दी जाए जो 100 पैकेट से ज्यादा का ऑर्डर दे रहे हैं। अब नेताओं को डर है कि बिरयानी का खर्च भी उनके चुनाव खर्च में जुड़ सकता है, लिहाजा वे बड़े ऑर्डर देने से बच रहे हैं।

27 साल का टूटा रिकॉर्ड

तिरुवल्लूर जिले के एक बिजनेसमैन ने कहा कि पिछले चुनाव में उसे हर दिन 800-1000 चिकन बिरयानी का ऑर्डर मिलता था। बिरयानी का ऑर्डर बड़ी पार्टियों जैसे कि डीएमके और एआईएडीएमके की तरफ से भी आता था। लेकिन इस बार किसी भी पार्टी से ऑर्डर नहीं मिला है। पिछले 27 साल से वे यह धंधा कर रहे हैं, लेकिन इस बार जैसा मंदा माहौल कभी नहीं दिखा।

Hindi News के लिए जुड़ें हमारे साथ हमारे फेसबुक, ट्विटरटेलीग्राम और वॉट्सएप पर…