अपहरण और रेप के आरोपी को पीड़िता की अपील पर मिली जमानत, पुलिस ने युवती को बताया था नाबालिग

अपहरण और रेप के आरोपी को पीड़िता की अपील पर मिली जमानत, पुलिस ने युवती को बताया था नाबालिग
अपहरण और रेप के आरोपी को पीड़िता की अपील पर मिली जमानत, पुलिस ने युवती को बताया था नाबालिग

बिलासपुर। हाईकोर्ट ने पॉक्सो एक्ट, रेप और अपहरण के एक आरोपी को जमानत पर छोड़ दिया। इस मामले में पीड़िता के पिता ने जमानत का विरोध किया था, मगर हाईकोर्ट ने पुलिस विवेचना में खामियों को देखते हुए अपना फैसला सुनाया।

यह मामला कोरबा जिले के बालको नगर इलाके से जुड़ा हुआ है, जहां रहने वाले युवक का इस युवती के साथ प्रेम संबंध है। 27 जनवरी 2021 को लड़की के पिता ने थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई और अपनी बेटी को नाबालिग बताया। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध अपहरण, पॉक्सो एक्ट व रेप का मुकदमा दर्ज किया। आरोपी को एक माह बाद गिरफ्तार कर लिया गया और लड़की को उसके पिता के सुपुर्द कर दिया गया।

पीड़िता ने खुद को बताया बालिग

इस मामले में आरोपी युवक ने निचली अदालत में जमानत की अर्जी लगाई, जो खारिज हो गई। इसके बाद उसने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। कोर्ट में अभियुक्त के अधिवक्ता की ओर से बताया गया कि पुलिस ने जिसे पीड़िता बताया है वह बालिग है और अपनी मर्जी से युवक के साथ गई थी। दोनों एक माह तक दिल्ली व पटना में साथ रहे हैं। एक दूसरे से दोनों प्रेम करते हैं और शादी करना चाहते हैं।

पीड़िता बालिग है और वह नहीं चाहती इस मामले में कोई कार्रवाई हो। जस्टिस आरसीएस सामंत की कोर्ट में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए युवती का पक्ष सुना गया। पीड़िता ने यह बात दोहराई और कहा कि वह आरोपी युवक के साथ शादी करना चाहती है। इधर युवती के पिता ने जमानत का विरोध यह कहते हुए किया कि उसकी बेटी अभी नाबालिग है। कोर्ट के संज्ञान में यह बात लाई गई कि पुलिस ने लड़की के उम्र के निर्धारण के लिये केवल सरपंच द्वारा एक जारी प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया है जिसकी वैधानिकता नहीं है। विवेचना में पीड़िता की उम्र को लेकर चूक बरती गई है।

स्कूल के दस्तावेज या बोन टेस्ट से ही आयु निर्धारण

गौरतलब है कि नाबालिगों के मामले में पीड़िता की उम्र की पुष्टि के लिए वैध दस्तावेजों की जरुरत पड़ती है। अमूमन स्कूल की अंकसूची को आधार बनाया जाता है, अन्यथा अनपढ़ होने की स्थिति में डॉक्टर के द्वारा बोन टेस्ट के आधार पर जारी प्रमाण पत्र की जरुरत होती है। मगर इस मामले में सरपंच द्वारा पीड़िता को नाबालिग बताते हुए उसकी उम्र का प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया, जबकि वह बालिग थी।

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