रायगढ़। औद्योगिक नगरी रायगढ़ के तमनार क्षेत्र में स्थित हिंडालको कंपनी के विरोध में धरने पर बैठे ग्रामीणों का आज आठवां दिन है, लेकिन धरना प्रदर्शन कर रहे लोगों की समस्याओं का उचित निराकरण आज तक नहीं हो पाया है। कंपनी की मनमानी से परेशान होकर धरने पर बैठे लोगों में विशेष पिछड़ी जनजाति समूह बिरहोर परिवार के सदस्य भी शामिल हैं।

एक ओर केंद्र सरकार द्वारा पीएम जनमन योजना के तहत विलुप्त हो रही जनजातियों के कल्याण के लिए कई सार्थक कदम उठाए जा रहे हैं, सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा व अन्य सेवाएं मुहैया कराई जा रही है, वहीं दूसरी ओर एक निजी कंपनी की मनमानी की वजह से ऐसी प्रजातियों को प्रताड़ना झेलना पड़ रहा है। कोल माइंस के विस्तार और कथित गलत पुनर्वास नीति के शिकार होकर बेघर हुए बिरहोर परिवार के लोगों को मजबूरन अब कड़ाके की ठंड में अलाव का सहारा लेकर धरना प्रदर्शन करना पड़ रहा है, लेकिन उनके सुनने वाला कोई अभी तक सामने नही आया है।

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नियम विरुद्ध घर उजाड़ने की शिकायत, मगर सुनवाई नहीं

दरअसल यहां बिरहोर परिवार को जीविका चलाने के लिए शासन की ओर से जमीन दी गई थी। पर यहां हिंडाल्को को मिले कोल ब्लॉक के माइनिंग प्रोजेक्ट का विस्तार का कार्य शुरू हो गया है। बिरहोर परिवार के निवास कंपनी ने धमकाते हुए तोड़ डाला। जिस जमीन पर बिरहोर समाज के लोग कृषि कार्य करते थे, वह जमीन भी उनके हाथों से निकल गई। कंपनी ने कुछ एक बिरहोर परिवार को बिना लिखा पढ़ी के अल्प मुआवजा राशि ही दी। वहीं विस्थापितों के लिए जो मुआवजारशी तय की गई थी वह नहीं मिली। सब कुछ छिन जाने के बाद बिरहोर समाज के लोगों के पास जीविका चलाने के लिए कुछ नहीं रहा। यहां रहने वाले 13 बिरहोर परिवार बिखर गए हैं।

आंदोलन कर रहे बिरहोरों द्वारा शिकायत पत्र में बताया गया है कि हिंडालको कंपनी द्वारा बिरहोर परिवार के लोगों का घर तोड़ने और जमीन को कोल माइंस प्रोजेक्ट में शामिल करने के बाद न तो उन्हें नई जमीन दी गई और नहीं सर्व सुविधायुक्त आवास की व्यवस्था की गई। पूर्ण विस्थापन और पुनर्वास नीति का फायदा भी नहीं मिला। कंपनी ने मुआवजा भी नहीं दिया।

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विधान सभा में यह मुद्दा उठाएंगी क्षेत्रीय विधायक

क्षेत्र के लोगों द्वारा हिंडालको कंपनी के विरोध में हड़ताल करने की सूचना मिलने पर क्षेत्र की कांग्रेस विधायक विद्यावती सिदार व अन्य कांग्रेसी नेता धरना स्थल पर पहुंचे। मौके पर घरघोड़ा एसडीएम से फोन पर बात की गई, तब एसडीएम ने कहा कि अगले कुछ दिनों में इनका निराकरण कर दिया जाएगा। और अगर धरना स्थल से यह नहीं उठते हैं, तो बलपूर्वक इन्हें उठा दिया जाएगा। धरना स्थल पर विधायक ने कहा कि मैं आंदोलनकारियों के साथ हूं। आगामी विधानसभा सत्र तक अगर उनकी समस्या का निराकरण नहीं होता है, तो मैं विधानसभा सत्र में भी यह मुद्दा उठाउंगी।