टीआरपी न्यूज। पाकिस्तान में सत्ता का सुख भोग चुके अधिकतर राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों का जीवन काल कोठरियों गुजरा। किसी को फांसी मिली तो किसी को जेल। कोई तख्ता पलट का शिकार हुआ तो कोई भ्रष्टाचार के लिए दोषी साबित हुआ।

अब पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ पाकिस्तान के ऐसे दूसरे पूर्व राष्ट्रपति हैं जिन्हें फांसी की सजा सुनाई गई है। उनसे पहले जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी पर लटका दिया गया था।

आइए जानें उन नेताओं को जिन्हें जेल की सलाखों की पीछे जाना पड़ा…

जुल्फिकार अली भुट्टो :

जुल्फिकार अली भुट्टो पर विपक्षी नेता की हत्या का आरोप था। उन्हें 3 सितंबर 1977 को सेना ने गिरफ्तार कर लिया। उन पर मुकदमा सीधे हाईकोर्ट में चला। 18 मार्च 1978 के लाहौर हाईकोर्ट ने जुल्फिकार अली भुट्टो को नवाब मोहम्मद अहमद खान की हत्या के जुर्म में फांसी पर लटकाने का आदेश दिया।

4 अप्रैल 1979 को रावलपिंडी में जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी दे दी गई। भुट्टो 1971 से 1973 तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे। इसके बाद वह 14 अगस्त 1973 से 5 जुलाई 1977 तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे।

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पाकिस्तान के तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल मोहम्मद जिया-उल-हक ने 5 जुलाई 1977 को उनका तख्तापलट कर दिया।

 

परवेज मुशर्रफ :

पाकिस्तान के तानाशाह रहे परवेज मुशर्रफ जब 2013 में पाकिस्तान लौटे तो उन्हें उनके घर में ही नजरबंद किया गया, बाद में जेल भेजा गया। परवेज मुशर्रफ पर बेनजीर भुट्टो की हत्या से जुड़े होने का मामला चला था।

परवेज मुशर्रफ खुद से ही पाकिस्तान छोड़कर दुबई में जिंदगी बिता रहे हैं। और आज उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई है।

बेनजीर भुट्टो :

पाकिस्तान की प्रधानमंत्री रहीं बेनजीर भुट्टो को 1999 में भ्रष्टाचार के आरोप में पांच साल की सजा सुनाई गई थी। उनपर 50 लाख पाउंड का जुर्माना लगाया गया था। इस आरोप के चलते बेनजीर 8 साल तक देश से बाहर रहीं थी, 2007 में लौटीं थीं। पाकिस्तान में उनकी हत्या कर दी गई थी।

 

आसिफ अली जरदारी :

बेनजीर के पति आसिफ अली जरदारी भी 8 साल जेल में रह चुके हैं। वह पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति रह चुके हैं। 10 अक्‍टूबर 1990 को अपहरण और वसूली के आरोप में उन्‍हें गिरफ्तार कर लिया गया था।

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1993 में वे पहली बार पाकिस्‍तान की कार्यवाहक सरकार में मंत्री बने। 1997 में जेल में रहते हुए ही आसिफ अली ने चुनाव जीता। 2005 में पाकिस्तान छोड़कर दुबई चले गए।


नवाज शरीफ :

पनामा पेपर लीक मामले में खुलासे के बाद पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने नवाज शरीफ को 10 साल और उनकी बेटी मरियम को 7 साल कैद की सजा सुनाई। 1999 में सेनाध्यक्ष जनरल परवेज मुशर्रफ ने तख्तापलट किया।

नवाज शरीफ को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। 2000 में सऊदी अरब में परिवार समेत निर्वासन की अनुमति मिली तो 2007 में शरीफ के पाकिस्तान में हवाई अड्डे से ही सऊदी अरब भेज दिया गया।

सऊदी के सुल्तान के हस्तक्षेप के बाद नवाज वापस पाकिस्तान लौटे और उन्हें जेल में डाल दिया गया। फिलहाल इलाज के लिए वह 20 नवंबर से लंदन में अपने बेटे हसन के फ्लैट पर रह रहे हैं।

 

यूसुफ रजा गिलानी :

2001 में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी को भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भेजा गया। अक्तूबर 2006 में जेल से रिहा हुए।

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शाहिद खाकान अब्बासी :

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी भी रावलपिंडी की जेल में कैद हैं।

 

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।