नई दिल्ली। देश में अब बड़े कारोबारी घराने और कंपनी भी अपना निजी बैंक खोल पाएंगी। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के एक कार्यकारी समूह ने निजी बैंकों में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी 15 साल में मौजूदा 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 26 प्रतिशत करने की सिफारिश की है।

केंद्रीय बैंक द्वारा गठित समूह ने यह भी सिफारिश की है कि बैंकिंग नियमन कानून में संशोधन और समूह के लिये निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के बाद बड़ी कंपनियों या औद्योगिक घरानों को बैंकों के प्रवर्तक बनने की अनुमति दी जा सकती है।

रिजर्व बैंक ने भारतीय निजी क्षेत्र के बैंकों के स्वामित्व दिशानिर्देश और कंपनी ढांचे की समीक्षा को लेकर आंतरिक कार्यकारी समूह का गठन 12 जून, 2020 को किया था। केंद्रीय बैंक ने समूह की रिपोर्ट जारी की।

RBI पैनल ने की सिफारिश

प्रवर्तकों की पात्रता के बारे में समूह ने कहा कि आपस में जुड़े कर्ज और बैंकों तथा अन्य वित्तीय तथा गैर-वित्तीय समूह इकाइयों के बीच कर्ज के मामले से निपटने के लिये बैंकिंग नियमन कानून, 1949 में संशोधन के बाद बड़ी कंपनियां/औद्योगिक घरानों को बैंकों का प्रवर्तक बनने की अनुमति दी जा सकती है। समूह ने बड़े समूह के लिये निगरानी व्यवस्था मजबूत बनाने की भी सिफारिश की है।

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उसने यह भी सुझाव दिया है कि बेहतर तरीके से परिचालित, 50,000 करोड़ रुपये और उससे अधिक संपत्ति वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को बैंकों में बदलने पर विचार किया जा सकता है। इसमें वे इकाइयां भी शामिल हैं जिनका कॉरपोरेट हाउस है। लेकिन इसके लिये 10 साल का परिचालन का होना जरूरी शर्त होना चाहिए।

समूह ने यह भी सुझाव दिया कि संपूर्ण बैंकिंग सेवाओं (यूनिवर्सल) के लिये नये बैंक लाइसेंस को लेकर न्यूनतम प्रारंभिक पूंजी 500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,000 करोड़ रुपये की जानी चाहिए। वहीं लघु वित्त बैंक के लिये 200 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 300 करोड़ रुपये की जानी चाहिए।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।