टीआरपी डेस्क। लगभग आधे भारतीय किसी नौकरी या आय के स्रोत के बिना एक माह से अधिक समय तक सर्वाइव नहीं कर सकते। लंबे लॉकडाउन और खराब अर्थव्यवस्था, नौकरी जाने से परिवार की चिंताएं बढ़ रही हैं कि वे आखिर कब तक घर चला पाएंगे। आईएएनएएस सीवोटर इकोनॉमी बैट्री वेव सर्वे के अनुसार, 28.2 फीसदी पुरुषों ने माना कि वे आय के बिना एक माह से कम समय तक सर्वाइव कर पाएंगे। जबकि 20.7 प्रतिशत ने कहा कि वे एक माह तक सर्वाइव कर सकते हैं।

सभी कॉमेंट्स देखैंअपना कॉमेंट लिखेंवहीं 10.7 प्रतिशत ने कहा कि वे बिना आय के एक वर्ष से ज्यादा समय तक सर्वाइव कर सकते हैं। वहीं दो महीने के लिए 10.2 प्रतिशत लोगों ने, जबकि तीन महीने के लिए 8.3 प्रतिशत लोगों ने और 4 से 6 महीने के लिए 9.7 प्रतिशत लोगों ने आय बगैर सर्वाइव करने की बात कही और 5.7 प्रतिशत लोगों ने कहा वे एक वर्ष से कम समय तक सर्वाइव कर सकते हैं।

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500 से अधिक लोकसभा सीटों से डेटा

इस सैंपल डेटा को जून के पहले सप्ताह में जुटाया गया है और इसका सैंपल साइज 1,397 है, और इसमें पूरे देश की 500 लोकसभा सीटों से भी ज्यादा को कवर किया गया है। यह 1000 से अधिक नए उत्तरदाताओं का साप्ताहिक ट्रैकर है। महिलाओं के लिए, बिना आय के एक महीने से भी कम या एक महीने के लिए सर्वाइव करने की संख्या समान है। महिलाओं में, 19.9 प्रतिशत ने कहा कि वे बिना नौकरी या आय के एक माह से कम समय के लिए सर्वाइव कर सकती हैं, वहीं 28.4 प्रतिशत ने कहा कि वे एक माह तक सर्वाइव कर सकती हैं। मोटे तौर पर यह आधी संख्या को जोड़ता है।

महिलाओं का सर्वाइवल रेट ज्यादा

कुल 11.5 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि वे एक वर्ष से भी ज्यादा समय तक सर्वाइव कर सकती हैं। सर्वे से यह स्पष्ट हुआ कि वरिष्ठ नागरिकों की बिना आय के सबसे अच्छी सर्वाइवल रेट है और वे अपनी बचत का लाभ उठा रहे हैं। वरिष्ठ नागरिक जिनमें 60 और इससे अधिक उम्र के हैं, में से 19.2 प्रतिशत ने कहा कि वे बिना आय के एक वर्ष तक सर्वाइव कर सकते हैं। बिना आय के सबसे कम सर्वाइवल रेट 25-40 वर्ष के आयु समूह की है, जहां 28.6 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वे बिना आय के बमुश्किल एक माह या इससे कम समय तक सर्वाइव कर सकते हैं।

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उच्च शिक्षा प्राप्त लोगों का सर्वाइवल रेट बेहतर

जाहिर है कि इसमें अधिक आय वर्ग या उच्च शिक्षा प्राप्त लोगों की सर्वाइवल रेट अच्छी है। सभी सामाजिक समूहों में से उच्च शिक्षा प्राप्त समूह में से 31.6 प्रतिशत ने कहा कि वे बिना आय के एक वर्ष से ज्यादा समय तक सर्वाइव कर सकते हैं। वहीं उच्च शिक्षित समूहों से यह संख्या 29.6 प्रतिशत है। वहीं मुस्लिमों में से एक माह से भी कम समय तक सर्वाइव करने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है, जिनकी संख्या 38.4 प्रतिशत है। वहीं एक माह तक सर्वाइव करने की संख्या 30.2 प्रतिशत है। वहीं इस समूह में 68 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जो बिना आय के एक माह से अधिक समय तक सर्वाइव नहीं कर सकते हैं।

पश्चिमी क्षेत्र का प्रदर्शन सबसे अच्छा

क्षेत्रवार बात करें तो, समृद्ध पश्चिमी क्षेत्र का इस मामले में प्रदर्शन सबसे अच्छा है, जहां केवल 17.2 प्रतिशत लोगों का कहना है कि वे एक माह से कम समय तक बिना आय के सर्वाइव कर सकते हैं, जबकि 15 प्रतिशत लोगों का कहना है कि वे एक वर्ष से अधिक समय तक सर्वाइव कर सकते हैं। वहीं पूर्वी क्षेत्र के 30.4 फीसदी लोगों का कहना है कि वे एक माह से भी कम समय तक सर्वाइव कर पाएंगे। पूरे क्षेत्र की बात करें तो 48 फीसदी से ज्यादा लोगों का मानना है कि वे एक माह या इससे कम समय तक बिना नौकरी के सर्वाइव कर पाएंगे।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।