उन्नाव। दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने उन्नाव की दुष्कर्म पीड़ित के पिता की न्यायिक हिरासत में मौत के मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर समेत 7 आरोपियों को दोषी करार दिया है। इस मामले में अदालत 12 मार्च को सजा सुनाएगी। कोर्ट ने सेंगर को धारा 120 बी के तहत दोषी माना, जबकि 4 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

तीस हजारी कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दिसंबर में कुलदीप सेंगर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। 9 अप्रैल 2018 को उन्नाव में पीड़ित के पिता की हिरासत में मौत हो गई थी। परिजन ने सेंगर और उसके साथियों पर उनकी हत्या का आरोप लगाया था।

पीड़ित के पिता को फंसाया गया था: जज

13 अगस्त 2019 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) धर्मेश शर्मा ने कहा था- पीड़ित के पिता को फंसाया गया था। इसके बाद उन्हें हिरासत में भेज दिया गया, जहां उनकी मौत हो गई। इसके पीछे क्या कोई मंशा थी? यह जांच का विषय है।

See also  UPSC ने प्रिंसिपल के 363 पदों पर भर्ती के लिए मांगे आवेदन, इस तारीख तक तक जारी रहेगी एप्लीकेशन प्रोसेस

उन्होंने कहा कि यह एक बड़ी साजिश थी, जो पीड़िता के पिता को पैरवी करने से रोकने के लिए की गई थी। कोर्ट ने कुलदीप सेंगर, उसके भाई अतुल सेंगर, उत्तर प्रदेश के 3 पुलिसकर्मियों और 6 अन्य लोगों पर आरोप तय किए थे। 29 फरवरी को हुई सुनवाई में अदालत ने फैसले के लिए 4 मार्च की तारीख तय की थी।

तीन साल पहले नाबालिग ने दुष्कर्म का आरोप लगाया था

उन्नाव में कुलदीप सेंगर और उसके साथियों ने 2017 में नाबालिग को अगवाकर सामूहिक दुष्कर्म किया था। इस मामले की जांच सीबीआई ने की थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केस दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था।

दिल्ली कोर्ट ने दोषी कुलदीप सिंह सेंगर (53) को 20 दिसंबर को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए उसे मृत्यु तक जेल में रखने के आदेश दिए थे। सेंगर पर 25 लाख रुपए जुर्माना भी लगाया गया था। कुलदीप सेंगर की विधानसभा सदस्यता भी रद्द की जा चुकी है।

See also  Tokyo Paralympics 2020: मेडल जीतने के करीब पहुंची भाविना पटेल, बनी टेबल टेनिस के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने वाली पहली भारतीय

कांग्रेस से बसपा-सपा में होते हुए भाजपा में आया कुलदीप

कुलदीप सेंगर की गिनती उत्तर प्रदेश के दलबदलू नेताओं में होती है। 4 बार से लगातार विधायक बन रहा कुलदीप कभी चुनाव नहीं हारा। उसने उन्नाव जिले की अलग-अलग सीटों से 3 बार चुनाव जीता। वह 2002 में पहली बार बसपा से सदर, 2007 में सपा से बांगरमऊ और 2012 में भगवंतनगर से चुनाव जीता था। 2017 में उसने भाजपा से बांगरमऊ सीट पर चुनाव जीता था।

Chhattisgarh से जुड़ी Hindi News के अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें 

Facebook पर Like करें, Twitter पर Follow करें  और Youtube  पर हमें subscribe करें।