नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना वायरस से संक्रमित गंभीर मरीजों को एजिथ्रोमाइसिन की दवाई देने पर रोक लगा दी है। एजिथ्रोमाइसिन को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (एचसीक्यू) के कॉम्बिनेशन के साथ कोरोना के गंभीर मरीजों को इलाज के लिए दिया जा रहा था। स्वास्थ्य मंत्रालाय के अनुसार एजिथ्रोमाइसिन कोरोना वायरस के मरीजों के लिए बहुत ज्यादा फायेदमंद साबित नहीं हो रहा था।

हार्ट पेशेंट के लिए साबित हो सकता है जानलेवा

अमेरिका की स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने दावा किया था कि कोरोना के मरीजों को दी जाने वाली ड्रग हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एजिथ्रोमाइसिन उनके लिए खतरनाक साबित हो सकती है। शोधकर्ताओं का दावा है कि दोनों दवाएं एक साथ दें या फिर अलग-अलग, इन दोनों ही स्थितियों में मरीज के कार्डियोवेस्कुलर सिस्टम पर बुरा प्रभाव पड़ता है। यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
हेल्थ जर्नल सर्कुलेशन में प्रकाशित इस शोध के मुताबिक, मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एंटीबायोटिक एजिथ्रोमाइसिन का असर मानव शरीर के हृदय पर पड़ता है। बताया गया है कि इसके इस्तेमाल से कोरोना के मरीजों के हृदय की धड़कन तेज या धीमी हो सकती है। 

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।