रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज कृषि बिल के विरोध में प्रेस कॉन्फ्रेंस लेने नागपुर के लिए रवाना हुए। इससे पहले पत्रकारों से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। कृषि बिल पर सवाल करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्यों को बिना विश्वास में लिए इस कानून को बनाया है। इससे राज्य को आर्थिक क्षति पहुंचेगी। आखिर केंद्र सरकार ने इस बिल को लाने से पहले किससे सलाह ली थी। नोटबंदी लागू हुआ, जिससे बैंक बंद हुए, जीएसटी लागू हुआ बहुत से उद्योग बंद हुए, अब इस कानून को लाने से इतना प्रभाव पड़ेगा, जिसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता।

मंडी की व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि नए कृषि कानून के संबंध में एआईसीसी के निर्देश पर कृषि विधेयक के विरोध में अपना पक्ष रखने का जिम्मा मिला है। मंडी बिल संशोधन के संबंध में बात रखनी है। इसमें पहली बात यह है कि अब मंडियों में अनाज खरीदने के लिए लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी, पैन कार्ड के आधार पर खरीदी की जा सकती है। इससे यह नुकसान होगा की मंडी की व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी और व्यवस्था ध्वस्त होने के साथ इनका असली चेहरा सामने आएगा।

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विवाद की स्थिति सुलझाने में एक लंबा समय लगेगा

मंडी में खरीदी के दौरान विवाद होने पर अथॉरिटी के समक्ष बातें होती थी हर राज्य के लिए अलग-अलग मंडी अधिनियम बनाई गई है, लेकिन यदि मंडी के बाहर खरीदारी होगी तो विवाद की स्थिति में उसे सुलझाने में एक लंबा समय लगेगा।

सभी राज्यों को सैकड़ों करोड़ों का नुकसान

अब तक मंडी शुल्क राज्यों को मिलता था, जिससे निर्माण कार्य होते थे, लेकिन अब सभी राज्यों को सैकड़ों करोड़ों का नुकसान होगा। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग करने पर समर्थन मूल्य से नीचे नहीं खरीदने का नियम डालना था, यदि कांटेक्ट फॉर्मिंग हुई तो किसान अपने खेत पर ही मजदूर हो जाएगा।

आम उपभोक्ताओं के लिए भी खतरनाक

तीसरा सबसे महत्वपूर्ण, यह किसानों के लिए ही नहीं आम उपभोक्ताओं के लिए भी खतरनाक है। अब कितने भी मात्रा में अनाज रखने की छूट मिल गई है। पहले जमाखोरों के खिलाफ छापामार कार्रवाई की जाती थी। लेकिन अब मुनाफे खोर भारत में अनाजों के मूल्यों का नियंत्रण करते हुए अनाज का कृत्रिम अभाव पैदा करेंगे, जिसके चलते दाम बढ़ेगा और इसका दुष्प्रभाव आम उपभोक्ताओं को भुगतना होगा। यह काले कानून की सच्चाई है जो देश के लिए बेहद खतरनाक है।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।