सोशल डिस्टैंसिंग का पालन किया जाएगा, 180 सीटों की कपैसिटी में हो सकते हैं सिर्फ 60 यात्री

नई दिल्ली। लॉकडाउन खुलने के बाद आपको कई फ्रंट्स पर महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। ऐसा मा्ना जा रहा है कि हवाई किराया कई गुना बढ़ जाएगा। इससे हवाई यात्रा मिडिल क्लास के बूते के बाहर हो जाएगी।

सोशल डिस्टैंसिंग का ध्यान रखते हुए एयरलाइन्स एक तिहाई के ऑक्यूपेंसी के साथ ऑपरेट करेंगी, लिहाजा आपको हवाई यात्रा पर पहले के मुताबले तीन गुना ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है।

ऐसा हो सकता है उड़ानों रीस्टार्ट का पहला फेज

एविएशन अथॉरिटीज एक ऐसे विकल्प के साथ उड़ानों के रीस्टार्ट पर विचार कर रही हैं, जिसमें तीन पैसेंजर्स की रो में सिर्फ एक यात्री बैठेगा और दूसरा पैसेंजर उसके पीछे वाली सीट पर डायग्नली बैठेगा ताकि सोशल डिस्टैंसिंग मेनटेन की जा सके।

अंदर ऐसी व्यवस्था की जाती है तो 180 सीटों के कैरियर में मजह 60 पैसेंजर सफर कर सकेंगे। ऐसे में कपैसिटी के नुकसान को पूरा करने के लिए एयरलाइन्स 1.5 से 3 गुना तक ज्यादा किराया वसूल सकती हैं। यह जानकारी अधिकारियों के हवाले से मिली है।

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धीरे-धीरे नियमों में दी जाएगी ढील

एक सीनियर अधिकारी ने बताया, ‘सीट की चौड़ाई को देखते हुए एक ही रो में दो पैसेंजरों के बीच मिडल बर्थ को खाली रखने से सोशल डिस्टैंसिंग का मकसद पूरा नहीं हो सकेगा।

समय के साथ, जैसे-जैसे कोरोना का संक्रमण घटता जाएगा और इसे कंट्रोल कपने के लिए दवाओं और वैक्सीन विकसित होंगे, हम धीरे-धीरे सोशल डिस्टैंसिंग के नियमों में ढील देना शुरू करेंगे।

1.5 मीटर की दूरी का खयाल

डायरक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) एक फ्लाइट रिजंप्शन प्लान तैयार कर रहा है, जिसे सरकार द्वारा लॉकडाउन के बाद ऑपरेशन्स शुरू करने के ऐलान के बाद लागू किया जाएगा।

ऐसा माना जारहा है कि रेगुलेटर एयरपोर्ट पर पैसेंजर्स के लिए 1.5 मीटर की दूरी पर पॉइट्स बनाएगी। ये निशान एंट्री गेट से शुरू होंगे और इमिग्रेशन से लेकर बोर्डिंग गेट तक जाएंगे।

शुरुआती हफ्तों में कम रहेगा एयर ट्रैवल

अधिकारी ने बताया कि इस बारे में एयरलाइन्स और एयरपोर्ट ऑपरेटर्स से पहले ही बात हो चुकी है। पहले कुछ हफ्तों में ट्रैवल काफी कम रहने की उम्मीद है, ऐसे में दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और अन्य एयरपोर्ट्स पर 1.5 मीटर की दूरी बनाने में कोई दिक्कत पेश नहीं आएगी।

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भारतीय एयरलाइन कंपनियों की सहेत खराब चल रही है। अकेली इंडिगो ऐसी बची है, जिसके बाद थोड़ा कैश रिजर्व है। कोविड-19 की महामारी के बाद कौन-कौन सी एयरलाइन कंपनियां अस्तित्व बनाए रख पाती हैं, यह देखा जाना बाकी है।

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