गर्भावस्था महिलाएं
image source : google

टीआरपी डेस्क। कोरोना वायरस किसी को भी अपनी चपेट में ले सकता है। इसलिए सरकार ने सभी से वैक्सीन लगवाने को कहा है। अब गर्भवती महिलाएं भी कोरोना की वैक्सीन लगवा सकती हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को गर्भवती महिलाओं के लिए एक नई गाइडलाइंस जारी की है। जिसमें कोविड-19 टीके के महत्व और उससे जुड़ी सावधानियों के बारे में जानकारियां दी गई है।

यह भी पढ़े: मॉडर्ना की कोरोना वैक्सीन को भारत में जल्द मिल सकती है मंजूरी, सिप्ला ने आवेदन किया

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी नई गाइडलाइंस में वैक्सीन लगवाने को लेकर गर्भवती महिलाओं की चिंता दूर की गई है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि कोरोना वैक्सीन गर्भवती महिलाओं के लिए पूरी तरह से सुरक्षित हैं। वैक्सीन गर्भवती महिलाओं को भी अन्य लोगों की तरह ही कोरोना संक्रमण से बचाव प्रदान करती है।

गर्भवती महिलाओं में संक्रमण के लक्षण

गाइडलाइंस में गर्भवती महिलाओं को टीका लगवाने की सलाह दी गई है। गाइडलाइंस में कहा गया है कि ज्यादातर गर्भवती महिलाएं में शुरुआत में संक्रमण के लक्षण हल्के होंगे, लेकिन फिर तेजी से उनका स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। इससे भ्रूण भी प्रभावित हो सकता है। यह महत्वपूर्ण है कि वह खुद को कोविड-19 से बचाने के लिए सभी सावधानी बरतें।

See also  Corona virus को हथियार बना Facebook, WhatsApp से शिकार बना रहे साइबर अपराधी

यह भी पढ़े: कार की डिक्की में बनाए गए चैंबर में छिपाकर करोड़ों की चांदी खपाने के फिराक में थे तस्कर, 1.76 करोड़ रुपए से ज्यादा की 243 किलो चांदी के साथ UP के 2 युवक गिरफ्तार

जिसमें कोविड के खिलाफ टीकाकरण भी शामिल है। इसलिए यह सलाह दी जाती है कि गर्भवती महिला को कोरोना वैक्सीन लगवानी चाहिए। बहुत कम गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण के 20 दिनों के भीतर कुछ लक्षण महसूस हो सकते हैं, जिन पर ध्यान देने की तत्काल आवश्यकता हो सकती है।

गर्भवती महिलाओं के लिए वैक्सीन जरूरी

नई गाइडलाइंस के मुताबिक, गर्भवती महिलाओं में कोरोना संक्रमण के लक्षण शुरुआती तौर पर मामूली होते हैं, लेकिन कई मामलों में देखा गया कि इसके कारण से उनकी सेहत में अचानक गिरावट आती है और इसका असर उनके गर्भ में पल रहे भ्रूण पर भी हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि गर्भवती महिलाएं अपनी सुरक्षा को लेकर सुनिश्चित हों।

See also  Parliament Monsoon Session: संसद में भारी हंगामे के बीच लोकसभा से तीन विधेयक बिना चर्चा के पारित, एफसीआरए संशोधन बिल जेपीसी को भेजा गया

यह भी पढ़े: कोविड कार्ड में दो-दो मुख्यमंत्री : स्वास्थ्य मंत्री का पदनाम भी मुख्यमंत्री छपवाने वाले BMO की जांजगीर कलेक्टर ने की छुट्टी

गाइडलाइंस में आगाह किया गया है कि 95 फीसदी से अधिक मामलों में कोविड पॉजिटिव माताओं के बच्चों का स्वास्थ्य जन्म के समय बेहतर रहा है, लेकिन कुछ मामलों में देखा गया है कि गर्भवस्था में कोविड संक्रमण के कारण प्री-मैच्योर डिलीवरी की स्थिति बनती है। ऐसे बच्चों का वजन 2.5 किलोग्राम से कम हो सकता है और जन्म से पहले ही यानी गर्भ में ही बच्चे की जान भी जा सकती है।

इन गर्भवती महिलाओं को अधिक खतरा

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि जिन गर्भवती महिलाओं की उम्र 35 साल से अधिक है। जिनका वजन भी अधिक है और जिन्हें डायबिटीज या हाई बल्ड प्रेशर की समस्या है, उन्हें कोविड-19 संक्रमण का खतरा अधिक है। गाइडलाइंस में यह भी कहा गया है कि अगर महिला गर्भावस्था के दौरान कोविड-19 की चपेट में आकर उससे उबर चुकी है तो वह थोड़ा इंतजार कर सकती है। लेकिन डिलीवरी के तुरंत बाद उसे वैक्सीन लगवा लेनी चाहिए।

See also  11 अप्रैल से सरकारी और प्राइवेट दफ्तरों में भी लगेगी कोरोना वैक्सीन, 100 से ज्यादा लाभार्थी हों तब मिल सकती है अनुमति

Hindi News के लिए जुड़ें हमारे साथ हमारे फेसबुक, ट्विटरटेलीग्राम और वॉट्सएप पर

 

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।