टीआरपी न्यूज/नई दिल्ली। देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 18 हजार के पार चली गई है और मंगवार तक 590 लोगों की मौत हो चुकी है। इस कोरोना से निपटने के लिए अभी तक कोई वैक्सीन नहीं बनी है लेकिन फिर भी भारत समेत दुनिया के कई देश इसके इलाज के लिए अलग-अलग दवाइयों को इस्तेमाल कर रहे हैं। भारत में भी मलेरिया की दवा से संक्रमितों का इलाज हो रहा है ।

अब देश में प्लाज्मा थैरेपी का भी इस्तेमाल हो रहा है। प्लाज्मा थैरेपी से दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल से एक मरीज के ठीक होने की खबर है। मैक्स अस्पताल के प्रबंधन ने बताया कि उनके यहां दिल्ली का एक मरीज भर्ती है, जो पहले बेहद गंभीर स्थिति में था लेकिन प्लाज्मा थैरेपी से उसका इलाज करने पर वह बहुत तेजी से रिकवर कर रहा है।

49 साल के कोरोना पा​जिटिव मरीज ने 4 दिनों में किया रिकवर

अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि 49 साल के यह शख्स 4 अप्रैल को कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया था और उसे अस्पताल में भर्ती किया गया। हालांकि शुरुआत में वह कोरोना के संक्रमण के मध्यम स्तर से गुजर रहा था लेकिन कुछ दिन बाद उसकी हालत गंभीर होने लग गई। उसे टाइप-1 रेस्पिरेटरी फेल्योर के साथ न्यूमोनिया हो गया। उसके बाद मरीज को 8 अप्रैल को वेंटिलेटर पर रखा।

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जब मरीज की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ तो 14 अप्रैल को अस्पताल के डॉक्टरों ने प्लाज्मा ट्रीटमेंट शुरू किया। इसके बाद मरीज की हालत सुधार होने लगा। 18 अप्रैल को उस मरीज को वेंटिलेटर से हटा दिया गया, अब उसकी हालत सामान्य है। अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि उसके दो कोरोना टेस्ट निगेटिव आए हैं।

बता दें कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने कोरोना वायरस से गंभीर रूप से बीमार लोगों पर प्लाज्मा तकनीक के ट्रायल को मंजूरी दे दी है। प्लाज्मा थेरेपी में कोरोना से ठीक हो चुके लोगों के खून से प्लाज्मा लेकर कोरोना मरीजों का इलाज किया जाता है।

प्लाज्मा थेरेपी से ऐसे होता है इलाज

प्लाज्मा थेरेपी में कोरोना वायरस से पूरी तरह ठीक हो चुके लोगों का 800 मिली. खून लिया जाता है और एंटीबॉडीज से युक्त प्लाज्मा अलग कर लिया जाता है। इसके बाद प्लाज्मा को कोरोना वायरस के मरीजों में इंजेक्ट किया जाता है। जब शरीर किसी बैक्टीरिया या रोगाणु के संपर्क में आता है तो प्रतिरक्षा तंत्र अपने आप सक्रिय हो जाता है और एंटीबॉडीज रिलीज होने लगती है।

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दरअसल कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों के प्लाज्मा में ऐसी एंटीबॉडीज होती हैं जो पहले ही कोरोना वायरस से लड़ चुकी होती हैं। स्टडीज से पता चलता है कि किसी प्रभावी दवा या वैक्सीन की गैर-मौजूदगी में प्लाज्मा थेरेपी कोरोना के इलाज में काफी हद तक असरदार साबित हो रही है।

चीन, दक्षिण कोरिया, यूएस और यूके भी इसका परीक्षण कर रहे हैं। बता दें कि 2003 में सार्स महामारी, एच-1एन-1 इन्फ्लुएंजा और 2012 में मार्स की महामारी के दौरान भी प्लाज्मा थेरेपी पर स्टडीज की गई थी।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।