बाल दिवस (Children’s Day, Chacha Nehru Birthday, Jawahar lal nehru birthday): आइए जानते हैं देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाने का प्रचलन कब से शुरू हुआ ..

बाल दिवस (Children’s Day, Chacha Nehru Birthday, Jawahar lal nehru birthday): आज 14 नवंबर को बाल दिवस

(Children’s Day) मनाया जाता है। इस दिन भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्म हुआ था, उन्हें

बच्चे बहुत पसंद थे।

 

बच्चे भी उन्हें बेहद प्यार से चाचा नेहरू कहकर पुकारते थे। चाचा नेहरू के जन्मदिन के रूप में बाल दिवस

मनाया जाता है। इस दिन बच्चों के भविष्य, शिक्षा और अधिकारों के बारे में लोगों को जागरुक करने के लिए

अनेक अभियान चलाए जाते हैं। आइए आगे जानने कि कोशिश करते हैं कि किस तरह चाचा नेहरू के

जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाने का प्रचलन शुरू हुआ..

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 बाल दिवस (Children’s Day) की शुरुआत कहानी

पूरे विश्व में पहली बार बाल दिवस की शुरुआत जून 1856 में इंग्लैंड के चेल्सी में हुई। वहां एक चर्च में बच्चों

के लिए एक स्पेशल डे रखा गया था जिसे अंग्रेजी भाषा में रोज़ डे भी कहा गया। इस दिन सभी प्रवचन,

हिदायतें और कहानियां बच्चों से जुडी हुआ करती थीं। यह प्रथा उन्नीसवीं शताब्दी के अंत और बीसवीं

शताब्दी के प्रारंभ तक काफी मशहूर हुई।

 

इसके बाद अधिकतर देशों ने अपनी सुविधा और क्षमता अनुसार बाल दिवस मानना शुरू किया और चुने

गए दिनों में बच्चों से जुड़े विषय पर बातचीत करना शुरू किया। 1950 में विमेंस इंटरनेशनल फेडरेशन ने

1 जून को विश्व में बाल दिवस मनाना तय किया। इसका कारण यह था कि 1 जून विश्व में प्रोटेक्शन ऑफ़

चिल्ड्रन डे पहले से मनाया जा रहा था।

 

वहीं 1954 में संयुक्त राष्ट्र ने बच्चों के अधिकारों की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए 20 नवम्बर को

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बाल दिवस घोषित किया। भारत ने और ज़्यादातर देशों ने संयुक्त राष्ट्र से सहमति जताते हुए 20 नवम्बर

को बाल दिवस घोषित किया।

उसी तर्ज पर 1954 से लेकर 1964 तक 20 नवम्बर को ही भारत में बाल दिवस के रूप में मनाया

जाता रहा। लेकिन 1964 में पं. जवाहरलाल नेहरू के देहांत हुआ। उसके बाद से भारत ने बाल

दिवस की तारीख में परिवर्तन कर ली और नेहरू का जन्म दिवस बाल दिवस बन गया। बच्चों के

प्रति नेहरू के अथा प्रेम को देखते हुए उनकी जन्मतिथि को बाल दिवस के रूप में अपनाया गया।

 

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।