नई दिल्ली। आतंकवाद के खिलाफ इजरायल ( Israel ) ने हमेशा से प्रचंड प्रहार किया है। इजरायल के एंटी टेररिस्ट मिशन में उसकी खुफिया एजेंसियों का बड़ा रोल रहा है। मोसाद ने कई नामुमकिन मिशन को मुमकिन बनाया है। मोसाद ( Mossad ) के हालिया कामयाब ऑपरेशन के बाद भारत में उम्मीद बढ़ गई है कि क्या हिंदुस्तान भी अपने दुश्मनों का अंत मोसाद स्टाइल में कर पाएगा?

इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के एक सीक्रेट ऑपरेशन की चर्चा आज पूरी दुनिया में हो रही है। मोसाद ने अलकायदा के टॉप लीडर समेत अलकायदा के पूर्व सरगना ओसामा बिन लादेन की बहू को भी मार गिराया। हमले में मारी गई मरियम अबू मोहम्मद अल-मसरी की बेटी थी, जो टेरर ट्रेनिंग ले रही थी।

ईरान में घुसकर ऑपरेशन

आतंकी अल मसरी से बदला अमेरिका को चाहिए था लेकिन ईरान ( Iran ) में घुसकर अबु मोहम्मद को मारना अकेले अमेरिका के लिए मुश्किल था। इसीलिए अमेरिका ने इजरायल की मदद ली और उसने अमेरिका ( America ) को बिल्कुल भी निराश नहीं किया।

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मोसाद का मिशन तेहरान

खुफिया एजेंसियों ने सबसे पहले ईरान में अबु मोहम्मद के ठिकाने का पता लगाया, भेष बदलकर नजर रखी और 7 अगस्त को मोसाद ने खुफिया मिशन पूरा करते हुए आतंकी बाप-बेटी का खात्मा कर दिया।

अबू अल मसरी का मारा जाना अमेरिका का बदला कैसे?

दरअसल वर्ष 1998 में केन्या और तंजानिया में अमेरिकी दूतावासों पर आतंकवादी हमले हुए थे। अलकायदा के आतंकी हमले में 224 लोग मारे गए थे, कई घायल हो गए थे। अबू मोहम्मद अल मसरी इन हमलों का मास्टर माइंड था। इन हमलों के बाद अमेरिकी एजेंसी FBI ने अबू मोहम्मद पर एक करोड़ डॉलर का इनाम घोषित किया था।

ये मोसाद का स्टाइल है

पश्चिमी मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक अलकायदा का टॉप कमांडर अबू मोहम्मद अल मसरी 7 अगस्त की रात 9 बजे जा रहा था। इस दौरान दो बंदूकधारियों ने कार रुकवाई और अबू मोहम्मद के साथ उसकी बेटी मरियम को भी गोली मार दी। हमलावरों ने साइलेंसर लगी गन का प्रयोग किया था, जिससे किसी को भनक तक नहीं लगी।

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मोसाद का काम है Covert Operation को कामयाबी के साथ पूरा करना। आतंकवाद के खिलाफ युद्ध और दुश्मनों के खात्मे के लिए सीक्रेट ऑपरेशन चलाने के मामले में मोसाद, अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA, रूस की KGB और ब्रिटेन की MI5 से भी काफी आगे है। मोसाद ने ईरान में घुसकर अलकायदा के नंबर 2 को मारकर ये बात फिर से साबित किया है।

आतंकवाद का एक ही इलाज ‘मोसाद’!

  • मोसाद ने अपने सभी ऑपरेशन सौ फीसदी कामयाबी के साथ पूरे किए हैं. इसे आप आतंकवाद के खिलाफ इजरायल का प्रचंड प्रहार भी समझ सकते हैं।
  • 1972 के म्यूनिख ओलंपिक में 11 इजरायली एथलीटों को अगवा करके फिलीस्तीनी आतंकियों ने मार दिया था. तब मोसाद ने आतंकियों को ढूंढ ढूंढ कर मारा।
  • 1976 में इजरायल के खुफिया कमांडो ने ‘ऑपरेशन Jonathan’ किया, तब आतंकियों ने 100 से ज्यादा बंधकों को सकुशल बचा लिया था।
  • 1976 में आतंकियों ने इजरायल का विमान हाईजैक किया तब मोसाद ने 5 हजार किलोमीटर दूर यूगांडा जाकर सफल कमांडो ऑपरेशन पूरा किया।
  • 7 जून 1981 को ऑपरेशन ओपेरा भी कामयाब रहा तब ईराक के परमाणु रिएक्टर पर एयर स्ट्राइक की गई थी. इजरायल के लड़ाकू विमान रडार से बचकर वहां पहुंचे थे।
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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।