नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने गत सप्ताह अपनी पहली वर्ल्ड विजन रिपोर्ट (World vision report) जारी की है। इस रिपोर्ट में दुनियाभर में आंखों की बीमारियों और उनसे निपटने के उपायों के बारे में चर्चा की गई है। नेत्र रोग दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहा है। खासकर ग्रामीण समुदाय, कम आय वाले देश और अधिक उम्र के लोग इस बीमारी की चपेट में आते जा रहे हैं। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में करीब 2.2 अरब लोग नेत्र रोगों से पीड़ित हैं। बढ़ती आबादी, बदलती जीवनशैली और आंखों की देखभाल करने के सीमित संसाधन बढ़ते नेत्र रोगों का प्रमुख कारण बन गया है.

एक अरब लोगों में अधिकांश मामले प्रेस्बोपिया के

रिपोर्ट में पाया गया कि विश्वस्तर पर 2.2 अरब से अधिक लोगों में दृष्टि दोष है। इसके साथ ही इन 2.2 अरब लोगों में एक अरब लोग ऐसे नेत्र दोष से पीड़ित हैं, जिनका इलाज किया जा सकता है। इन एक अरब लोगों में अधिकांश मामले (लगभग 82.6 करोड़) प्रेस्बोपिया के हैं। यह उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारी है, जिसमें लोगों को पास की वस्तुएं धुंधली दिखने लगती हैं। अन्य लगभग 12 करोड़ मामले रिफ्रेक्टिव इरर के हैं। इस बीमारी में लेंस किसी वस्तु से टकराकर आने वाली प्रकाश की किरणों को पूरी तरह से मोड़ नहीं पाता, जिससे धुंधलापन आ जाता है।

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शहरी आबादी में दृष्टि दोष के मामले कम

रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रामीण समुदाय, कम आय वाले देश और अधिक उम्र के लोग इन दोषों से ज्यादा जूझ रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि शहरी आबादी में दृष्टि दोष के मामले कम होते हैं। उदाहरण के लिए, भारत में दिल्ली की शहरी आबादी में (60-69 वर्ष के बीच) 20 प्रतिशत लोगों में दृष्टि दोष पाया गया। यह आंकड़े उत्तर भारत के ग्रामीण इलाकों के मामले एक तिहाई कम हैं। यहां 28 फीसद लोगों में दृष्टि दोष पाया गया।

वैश्विक स्तर पर 1.19 करोड़ लोग ग्लूकोमा से जूझ रहे

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वैश्विक स्तर पर 1.19 करोड़ लोग ग्लूकोमा, ट्रेकोमा और डायबिटिक रेटिनोपैथी से जूझ रहे हैं। इन बीमारियों की समय रहते रोकथाम की जा सकती थी। 1.19 करोड़ लोगों में इन बीमारियों को रोकने में अनुमानित लागत 5.8 अरब डॉलर के कुछ अधिक आती। हालांकि, निम्न मध्यम आय वर्ग वाले देशों में मोतियाबिंद को लेकर सुधार दिखा है।

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भारत में मोतियाबिंद सर्जरी की दर 31 साल में नौ गुना बढ़ी

विश्व स्तर पर में अंधेपन के सबसे बड़े कारण मोतियाबिंद की सर्जरी हो रही है। भारत में मोतियाबिंद सर्जरी की दर 1981 से 2012 के बीच नौ गुना बढ़ी है। यहां प्रति दस लाख की आबादी में 6000 सर्जरी हुई हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि यह नेशनल प्रोग्राम फॉर कंट्रोल ऑफ ब्लाइंडनेस के कारण संभव हुआ, जिसे 1976 में लांच किया गया था और 2016- 17 में 65 लाख लोगों की मोतियाबिंद की सर्जरी की गई थी।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।