टीआरपी डेस्क। छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार का खुलासा करने पर ईनाम का तरीका जानकर हैरान हो जाएंगे। यहां किसी रसूखदार और पावरफुल संस्था या व्यक्ति की काली करतूतों पर से पर्दा हटाना मतलब सीधे-सीधे अपनी नौकरी को दांव में लगाना है। कृषि विभाग के एक अफसर को भी एक्सपायरी डेट की कीटनाशक सप्लायर कंपनी के भ्रष्टाचार उजागर करने के एवज में अजीबो-गरीब सजा मिली है।

बलौदाबाजार कृषि उप संचालक ने सत्यम बायोटेक के काले कारनामों का किया था पर्दाफाश

ताजा मामला बलौदाबाजार कृषि उप संचालक चौबे का सामने आया है, जिन्हें सत्यम बायोटेक कंपनी की काली करतूतों पर से पर्दा हटाने का इनाम निलंबन के तौर पर मिला है। अफसर का कसूर बस इतना है कि उन्होंने एक्सपायरी डेट की दवाओं में नया लेबल चिपकाकर सरकार और किसानों को चूना लगाने वाली सत्यम बायोटेक के कारनामे को उजागर कर दिया।

गौर करने वाली बात ये है कि जिस कंपनी की काली करतूत अफसर ने खोली, उसने कमीशन का पिटारा पहले ही राज्य के रसूखदारों के सामने रख दिया था, ऐसे में जाहिर है कि कमीशनखोर मामले में कोई दखलअंदाजी नहीं चाहते थे। लेकिन फिर भी अफसर ने करोड़ों के झोल का पर्दाफाश किया और कंपनी का कारनामा सबके सामने लाने की हिमाकत की। इसके परिणामस्वरुप सत्यम बायोटेक को ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया।

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करोड़ों के भ्रष्टाचार के सबूत मिलने के बाद भी कई अफसरों पर आशीर्वाद

इस मामले के कुछ महीने बीत जाने के बाद खुलासा करने वाले अफसर के साथ एक ट्विस्ट हुआ। जिसके अंतर्गत एक पुराने पेंडिंग मामले में बलौदाबाजार कृषि उप संचालक को 20 लाख की गलत आपूर्ति में दोषी बताकर निलंबित कर दिया गया, जबकि उसी विभाग में कई ऐसे अधिकारी अब भी काबिज हैं, जिन्हे 4-4 करोड़ की सप्लाई में दोषी पाया गया है। बाकायदा भ्रष्टाचार के सबूत पाए जाने के बाद भी अधिकारियों पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गयी। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है आखिर कब तक कृषि विभाग में रसूख और चहेतों को लाभ पहुंचाने का खेल चलता रहेगा ? सत्यम बायोटेक के काले कारनामे पर से पर्दा उठाना राज्य के किन रसूखदारों को नागवार गुजरा? मामला दबाने वाला या राज खोलने वाला कौन सा अफसर सही?

एसीएस से नहीं मिला जवाब

द रूरल प्रेस ने इस संबंध में कृषि विभाग की एसीएस एम गीता से दूरभाष और मैसेज के माध्यम से उनका पक्ष जानना चाहा, लेकिन फ़िलहाल उनका कोई जवाब नहीं मिल सका है।

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सुलगते सवाल

सत्यम बायोटेक को आखिर सत्तापक्ष के किस रसूखदार का सरंक्षण मिल रहा है? एक्सपायरी डेट की कीटनाशक सप्लाई करने वाली कंपनी पर किस कमीशनखोर की मेहरबानी बनी हुई है? अन्नदाता किसानों की फसल बर्बाद करने वाली कंपनियों को किसका आशीर्वाद?

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।