Vegan Egg : पौधों से बना अंडा! अब शाकाहारी भी खा सकेंगे ऑमलेट और एग-रोल
Vegan Egg : पौधों से बना अंडा! अब शाकाहारी भी खा सकेंगे ऑमलेट और एग-रोल

टीआरपी डेस्क। क्या आपने कभी सोचा है कि अंडे के जैसा स्वाद ( Vegan Egg ) आपको किसी और चीज से मिल जाए? शायद नहीं, और अगर सोचते भी होंगे तो ख्याल आता होगा कि यह किस तरह मुमकिन है? जी हां यह मुमकिन है! और इसे मुमकिन बनाया है, मुंबई के एक स्टार्टअप ने। जिन्होंने पौधों के प्रोटीन से एक ऐसा प्रोटोटाइप बनाया है, इसका स्वाद अंडे जैसा ही है और इससे बने ऑमलेट और सैंडविच का स्वाद भी बिल्कुल वैसा ही आता है।

अंडे के इस विकल्प को बनाया है मुंबई स्थित स्टार्टअप ‘इवो फूड्स‘ (Evo foods) ने। उन्होंने तरल रूप में अंडे का विकल्प बनाया है। इस स्टार्टअप को 2019 में कार्तिक दीक्षित और श्रद्धा भंसाली ने शुरू किया है और लगभग एक साल में उन्होंने अपना यह प्रोटोटाइप तैयार किया है। यह प्रोटोटाइप स्वाद, बनावट, रसायन और पोषक तत्व के मामले में फेंटे हुए अंडे के समान है। इसका इस्तेमाल ऑमलेट, अंडा रोल आदि व्यंजन बनाने में किया जा सकता है। वे इसकी कीमत, देश में अंडों की सामान्य कीमत के बराबर रखने में सफल रहे हैं।

इस तरह हुई शुरूआत

आज ऐसे कई कारण हैं कि लोग पौधों पर आधारित आहार का विकल्प चुन रहे हैं जैसे- स्वास्थ्य और पशु कल्याण। लेकिन, कार्तिक के लिए इसके पीछे की मुख्य प्रेरणा जलवायु परिवर्तन है। ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में पशु कृषि का योगदान 18 प्रतिशत है। जो इसे ग्लोबल वार्मिंग के मुख्य कारकों में से एक बनाता है। इस जानकारी से हैरान कार्तिक ने बहुत पहले वीगन होने का फैसला कर लिया था।

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2014 में, पुणे में स्टार्टअप लीडरशिप प्रोग्राम पूरा करने के बाद, उन्होंने पशु-आधारित खाद्य पदार्थों के लिए अच्छे शाकाहारी/पौधों पर आधारित खाद्य विकल्प बनाने पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया।

उन्होंने शाकाहारी अंडे ( Vegan Egg ) के बारे में सोचा। अंडा, भारत में सबसे अधिक प्रचलित पशु-आधारित खाद्य पदार्थों में से एक हैं। Vegan Egg के इस विचार पर काम ही कर रहे थे कि फूड स्टार्टअप्स के लिए एक सम्मेलन में उनकी मुलाकात श्रद्धा से हुई। इससे कुछ समय पहले ही श्रद्धा, रेस्तरां उद्योग में शिक्षा और अनुभव के साथ अमेरिका से लौटी थीं। वह मुंबई में अपना वीगन रेस्तरां ‘कैंडी ऐंड ग्रीन’ चलाती हैं और शाकाहारी जीवन शैली की समर्थक हैं। उन्होंने भोजन के भविष्य पर चर्चा की और उन्हें एक-दूसरे के विचार पसंद आए। उन दोनों की मुलाकात दिसंबर, 2018 में हुई थी और अगस्त, 2019 में उन्होंने अपने स्टार्टअप की स्थापना की।

श्रद्धा बताती हैं, “मैं भोजन के प्रति लोगों के नजरिए को बदलना चाहती थी। और मुझे एहसास हुआ कि ईवो जैसी चीज के माध्यम से ही, ज्यादा लोगों तक पहुंचा जा सकता है। हमारा लक्ष्य दुनिया के लिए उच्च-गुणवत्ता, और किफायती प्रोटीन का स्रोत बनाना है।”

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और बन गया अंडे का विकल्प

अंडे के विकल्प को बनाने के लिए उन्होंने जिस भी कच्चे माल का इस्तेमाल किया, वह सब स्वदेशी है। कार्तिक बताते हैं, “हम अपने उत्पाद को बनाने के लिए भारतीय फलियों से प्रोटीन निकालते हैं और इस्तेमाल करते हैं। यह पूरी तरह से पौधों पर आधारित है।” वीगन अंडा, प्रोटीन की मात्रा के मामले में भी असली अंडे के बिल्कुल करीब है तथा इसकी रेसिपी को उन्होंने पेटेंट करा लिया है।

इसे मापने का एक तरीका पीडीसीएएएस (प्रोटीन डाइजेस्टेबिलिटी कर्रेक्टेड एमिनो एसिड स्कोर) है। इसका मान उच्चतम गुणवत्ता वाले प्रोटीन के लिए 0 से लेकर 1 तक है। उदाहरण के लिए, सोया प्रोटीन में 0.9 का PDCAA स्कोर है, लेकिन अंडे और मांस में 1 PDCAA स्कोर है। अंडे की तुलना में, इसके विकल्प में कम कैलोरी है और कई विटामिन जैसे डी3 और बी12 हैं, जो इसे स्वस्थ प्रोटीन स्रोत बनाते हैं। इसमें कोलेस्ट्रॉल और एंटीबायोटिक्स भी नहीं हैं।

कार्तिक और श्रद्धा कहते हैं कि इसमें कई फ्लेवर (विशेष सामग्रियां) मिलाकर अंडे जैसा स्वाद लाना तो आसान था लेकिन, पकने के बाद व्यंजन की बनावट भी वैसी ही होगी, यह चुनौती भरा काम था। इस पर वे अभी भी काम कर रहे हैं।

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इसे रखने की समयावधि (शेल्फ-लाइफ) पर भी वह काम कर रहे हैं और एक बार यह हो जायेगा तो लॉजिस्टिक्स (कर्मचारियों और माल की व्यवस्था) की परेशानी भी हल हो जाएगी। वे अंडे के विकल्प को बेकिंग के लिए भी उपयुक्त बनाने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि वर्तमान संस्करण (current version) केवल तवे या कड़ाही में बनने वाले व्यंजनों के लिए है।

धीरे–धीरे बढ़ रहे हैं आगे

इवो वर्तमान में छह लोगों की एक टीम है, जिसमें दो संस्थापक, चार खाद्य वैज्ञानिक और इंजीनियर शामिल हैं। अपने स्टार्टअप और प्रोटोटाइप के लिए उन्हें ‘बिग आइडिया वेंचर्स’ और ‘रयान बेथेनकोर्ट’ जैसे संगठनों से फंडिंग मिली है। आगे की योजनाओं पर बात करते हुए वह कहते हैं, “अभी हमारा ध्यान पूरी तरह से अंडे पर होगा। यह दुनिया भर में 200 बिलियन डॉलर का बाजार है इसलिए, अंडा डिशेज बनाने और उन्हें बेहतर बनाने के लिए पर्याप्त मौके तथा स्थान मौजूद है।”

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।