टीआरपी डेस्क। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए दिशा-निर्देशों के तहत अपर मुख्य सचिव (ACS), प्रमुख सचिव (PS), और सचिव को मिलने वाला समय कम किया जाएगा, ताकि कलेक्टरों को अपनी बात रखने और फीडबैक देने का ज्यादा मौका मिले।

कलेक्टरों के फीडबैक पर जोर

नए नियमों के अनुसार, प्रत्येक सत्र में कम से कम छह कलेक्टर अपने अनुभव, सुझाव और नवाचार साझा करेंगे। वे उन समस्याओं को उजागर करेंगे, जिनमें विभागों की ओर से देरी, जैसे पत्रों का समय पर जवाब न मिलना, पोर्टल का सुचारू न चलना, या बजट से संबंधित बाधाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब कॉन्फ्रेंस में भोपाल के अधिकारियों के बजाय मैदानी स्तर के कलेक्टरों से फीडबैक लिया जाएगा।

अधिकारियों का समय घटा, कलेक्टरों को प्राथमिकता

पहले ACS, PS, और सचिव को प्रत्येक सत्र में 50 मिनट का समय मिलता था, जिसे अब घटाकर 15-20 मिनट कर दिया गया है। प्रत्येक सत्र को 30 मिनट का समय निर्धारित किया गया है, जिसमें आठ कलेक्टर चुने जाएंगे। प्रत्येक कलेक्टर को अपनी समस्याएं और सुझाव रखने के लिए तीन मिनट का समय मिलेगा। इसके बाद 10 मिनट में सत्र का सार निकाला जाएगा। कुल आठ सत्र प्रस्तावित हैं, जिनमें से प्रत्येक को 75 मिनट का समय दिया जाएगा।

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