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चिरमिरी नगर निगम में शोपीस बने लाखों के वाहन और मशीनें, शहर सौंदर्यकरण का सामान लापरवाही से कबाड़ में हो रहा तब्दील।

चिरमिरी नगर निगम में शोपीस बने लाखों के वाहन और मशीनें, शहर सौंदर्यकरण का सामान लापरवाही से कबाड़ में हो रहा तब्दील।
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

एमसीबी। जिले के चिरमिरी नगर पालिक निगम में जनता के टैक्स के पैसों के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा लाखों रुपए खर्च कर कई नई गाड़ियां, डस्टबिन और प्लास्टिक कटर मशीनों की खरीदी की गई थी, लेकिन ये संसाधन अब उपयोग की बजाय शोपीस बनकर रह गए हैं।

महीनों से धूल फांक रही हैं नई गाड़ियां

हालात यह हैं कि निगम के फायर स्टेशन परिसर में कई नई गाड़ियां महीनों से खड़ी-खड़ी धूल फांक रही हैं। जिन वाहनों और मशीनों का इस्तेमाल शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने और कचरा प्रबंधन के लिए किया जाना था, लेकिन वे अब तक जमीन पर सक्रिय नजर नहीं आ रहे हैं। इससे नगर निगम की कार्यप्रणाली और संसाधनों के सही उपयोग पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

लाखों के उपकरण बेकार पड़े हैं

स्थानीय लोगों का आरोप है कि शहर में सफाई व्यवस्था बदहाल बनी हुई है, जबकि दूसरी ओर लाखों की लागत से खरीदे गए वाहन और उपकरण बेकार पड़े हुए हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि योजनाओं का लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है।

'कमीशनखोरी के लिए खरीदे गए थे वाहन-मशीनें'

चिरमिरी के पूर्व महापौर के. डमरू रेड्डी ने निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वाहनों और मशीनों की खरीदी केवल कमीशनखोरी के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए एमसीबी कलेक्टर से शिकायत की है।

आरोपों का खंडन किया निगम आयुक्त ने

जब इस पूरे मामले को लेकर नगर पालिक निगम चिरमिरी के आयुक्त आर.पी. अचला से बात की गई तो उन्होंने कहा कि आरोप गलत हैं, निगम द्वारा समय-समय पर इन वाहनों और मशीनों का उपयोग किया जाता है। हालांकि मौके की तस्वीरें और जमीनी स्थिति कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं।

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