-केरल की तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट के सियासी समर का सामरी

तिरुवनंतपुरम । केरल की इस लोकसभा सीट पर कांग्रेस, भाजपा और एलडीएफ के बीच सीधा मुकाबला होगा। इस सीट पर सांसद शशि थरूर को भाजपा के दिग्गज नेता कुम्मनम राजशेखरन और सीपीआइ के विधायक सी दिवाकरन कड़ी टक्कर दे रहे हैं। बीते चुनावी प्रदर्शनों को देखते हुए विशेषज्ञ इस सीट पर कोई भविष्यवाणी करने से बच रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के शशि थरूर यहां से दो बार एमपी रह चुके हैं। उनकी कोशिश यहां से हैट्रिक बनाने की होगी। ऐसे में डर है कि कहीं भाजपा के राजशेखरन और सीपीआई के दिवाकरन उनकी हैट्रिक को हैंग न कर दें?
राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी एलडीएफ शशि थरूर को जिताकर अपनी सियासी ताकत का इजहार करने की कोशिश करेगी। पिछले चुनावी आंकड़ों पर अगर नजर डालें तो थरूर के वोटों की बढ़त लगातार घट रही है। ऐसे में इसका लाभ उनके विरोधी को मिल सकता है।

क्या कहते हैं आंकड़े:

प्रदेश की सत्तारूढ़ पार्टी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ), विपक्षी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) और भाजपा के बीच इस सीट पर मुकाबला कठिन माना जा रहा है। यूडीएफ का नेतृत्व कांग्रेस कर रही है। शशि थरूर तीसरी बार उसके उम्मीदवार हैं। 2014 में उनकी जीत का अंतर करीब सात गुना घट गया था। यही वह सीट है जो भाजपा के लिए दक्षिण में उम्मीद जगाती है। केरल के सबसे दक्षिणी छोर पर स्थित तिरुवनंतपुरम भौगोलिक रूप से अरब सागर तट से लेकर पश्चिमी घाट के ढलान तक फैला है। थरूर 2009 में 99 हजार वोटों से जीते तो 2014 में यह अंतर सिर्फ 15 हजार वोट का रह गया था। भाजपा के ओ राजगोपाल ने उन्हें कड़ी टक्कर दी थी। फिर भी थरूर मानते हैं कि क्षेत्र में बीते 10 वर्ष में कराए कार्यों की वजह से वे अपना प्रदर्शन सुधार सकेंगे।

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भाजपा को सबरीमला की महिलाओं का सहारा :

दक्षिण भारत के सबरीमला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश दिला कर भाजपा इस क्षेत्र में अपना खाता खोलना चाहती है। भाजपाई रणनीतिकारों का मानना है कि सबरीमला में महिला वोटर्स काफी ज्यादा हैं। भाजपा ने एनएसएस के अनुरूप ही सबरीमला मुद्दे पर अपना रुख बनाया। सीट पर कुल 13. 34 लाख मतदाता है, जिनमें 6. 90 लाख महिलाएं हैं। यानि महिला मतदाताओं की संख्या अधिक है। अब यही संख्या अगर वोट में कन्वर्ट हो जाए तो राजशेखरन का जीतना लगभग तय हो जाएगा। उसके इसी तर्क को आरएसएस का भी समर्थन है। तो वहीं आरएसएस के कार्यकर्ता यहां प्रधानमंत्री मोदी के विकास कार्यों को भी खूब प्रचारित कर रहे हैं।

साफ-सुथरी छवि के उम्मीदवार राजशेखरन:

मिजोरम के राज्यपाल का पद छोड़कर चुनाव में उतारे गए भाजपा प्रत्याशी राजशेखरन की छवि काफी साफ-सुथरी मानी जाती है। उनकी क्षेत्र में अच्छी पहचान है। इसे आरएसएस की रणनीति माना जा रहा है। आरएसएस अपने संगठन के बल पर उनके लिए व्यापक जनसमर्थन जुटाने में लगा है।

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सीपीआई नेता दिवाकरन का दावा:

एलडीएफ के प्रत्याशी सीपीआइ नेता सी दिवाकरन को अपने क्षेत्र में ट्रेड यूनियन लीडर के तौर पर व्यापक पहचान मिली हुई है। पिछले चुनाव में सीपीआइ के डॉ अब्राहम तीसरे नंबर पर रहे थे। दिवाकरन कहते हैं, थरूर लोगों की अपेक्षाओं पर खरा न उतरने वाले नेता हैं। इसलिए मेरी जीत तय है। सबरीमला मामले में भाजपा और यूडीएफ दोनों को नुकसान होगा।
भाजपा को अपने रुख की वजह से और यूडीएफ को सुप्रीम कोर्ट का निर्णय लागू करने में दिखाई जिद की वजह से, जिसने आस्तिकों की भावना के विरुद्ध सभी उम्र की महिलाओं को सबरीमला मंदिर में प्रवेश करने दिया, वे मानते हैं कि विजयन सरकार ने अच्छा काम किया है।

कौन जीता कौन हारा:

वीके कृष्णा मेनन : 1970 में निर्दलीय सांसद। इन्हें वाम का समर्थन था।
एमएन गोविंदनन नायर : 1971 में सीपीआइ से जीते।
के करुणाकरन : 1998 में कांग्रेस से सांसद बने।
पीके वासुदेवन नायर : 2004 में केरल सांसद बने। वह पूर्व सीएम थे।
गोविंदनन नायर : 1980 में सांसद बने।
ओएनवी कुरुप : ज्ञानपीठ पुरस्कृत प्राप्त लेखक को हार भी मिली।

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