बिलासपुर हाईकोर्ट को जल्द मिल सकते हैं नए चीफ जस्टिस

बिलासपुर। बिलासपुर हाईकोर्ट को जल्दी ही नए चीफ जस्टिस मिल सकते हैं। इसके लिए कोलेजिएम ने केरल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेमन के नाम को रेकमेंड किया है। ये नाम राष्टÑपति रामनाथ कोविंद को भेज दिया गया है। इसके बाद अब फैसला राष्टÑपति को करना होगा। इसके बाद की कार्यवाही राष्टÑपति भवन में होगी। उसके बाद ही बिलासपुर उच्च न्यायालय को नए चीफ जस्टिस मिल जाएंगे। इससे पहले चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति अजय मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनको केंद्रीय लोकपाल का सदस्य बनाया गया है। तो वहीं वर्तमान समय में न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा बतौर कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश कार्य कर रहे हैं।

बिलासपुर हाईकोर्ट को जल्द मिल सकते हैं नए चीफ जस्टिस

बिलासपुर। बिलासपुर हाईकोर्ट को जल्दी ही नए चीफ जस्टिस मिल सकते हैं। इसके लिए कोलेजिएम ने केरल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेमन के नाम को रेकमेंड किया है। ये नाम राष्टÑपति रामनाथ कोविंद को भेज दिया गया है। इसके बाद अब फैसला राष्टÑपति को करना होगा। इसके बाद की कार्यवाही राष्टÑपति भवन में होगी। उसके बाद ही बिलासपुर उच्च न्यायालय को नए चीफ जस्टिस मिल जाएंगे। इससे पहले चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति अजय मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनको केंद्रीय लोकपाल का सदस्य बनाया गया है। तो वहीं वर्तमान समय में न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा बतौर कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश कार्य कर रहे हैं।

जानिए अपने नए चीफ जस्टिस के बारे में:

1 जून 1959 को जन्में जस्टिस रामचंद्र मेनन ने एनार्कुलम के गवर्नमेंट ला कालेज से डिग्री ली। इसके बाद 8 जनवरी 1983 को एक वकील के रूप में उनका नामांकन दर्ज हुआ। उन्होंने लेबर, इंश्योरेंस और कान्सिट्यूशनल ला के क्षेत्र में एनार्कुलम में वकालत की। 5 जनवरी 2009 को केरल उच्च न्यायालय में एडिशनल जज का दायित्व संभाला। केरल उच्च न्यायालय ने 15 दिसंबर 2010 को उन्हें नियमित जज के रूप में नियुक्त किया था।

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस बनाए गए पी आर रामचंद्र मेनन बहुचर्चित सबरीमाला मंदिर विवाद से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई में अहम भूमिका में रहे हैं। सबरीमाला मंदिर विवाद से जुड़ी कई याचिकाओं को केरल हाईकोर्ट के वरिष्ठ जस्टिस रहते हुए पी आर रामचंद्र मेनन और जस्टिस एन अनिल कुमार की खंडपीठ ने स्वीकार किया था। अपने एक अहम फैसले में उन्होंने आदेश दिया था कि मंदिर परिसर में किसी भी तरह का प्रदर्शन नहीं होना चाहिए। यह स्थल ऐसी गतिविधियों के लिए नहीं है। हर हाल में मंदिर परिसर में सीआरपीसी की धारा 144 को प्रभावी ढंग से लागू किए जाने का आदेश भी दिया गया था। खंडपीठ ने महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों को मंदिर परिसर में कुछ देर रूकने की अनुमति भी दी थी।

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