बिजली बिल आधा करने की योजना सतही स्तर पर ही लागू
जगदलपुर। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है और कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के पहले लोगों के बिजली बिल आधा करने की जो घोषणा की थी। मगर अबतक इसे प्रभावशाली ढंग से लागू नहीं किया जा सका है। इसके चलते जनता में आक्रोश व क्षोभ विद्यमान है। इस योजना का लाभ केवल मुट्ठीभर भर उपभोक्ताओं को इस योजना का थोड़ा सा लाभ मिल सका है।घरेलू उपभोक्ताओं को नहीं मिल रहा लाभ :
इस योजना के क्रियान्वयन में सबसे बड़ी बाधा लोगों के बिजली बिल बकाया होने से हो रही है। जिन उपभोक्ताओं के बिजली बिल 400 यूनिट तक हैं। नियमत: उन्हें आधा बिजली बिल माफ होना चाहिए था, लेकिन उनके पिछले बिजली बिल का भुगतान न हो पाने के कारण उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार रियायती बिजली बिल केवल घरेलू उपभोक्ताओं के लिए लागू की गई है, जिसमें 400 यूनिट तक की खपत को इसमें शामिल है। इससे ज्यादा खपत होने पर आधा बिजली बिल माफ होने का लाभ नहीं मिल पा रहा है।कई उपभोक्ताओं ने नहीं जमा किया बिल :
इस योजना के क्रियान्वयन में सबसे बड़ी बाधा लोगों के बिजली बिल बकाया होने से हो रही है। जिन उपभोक्ताओं के बिजली बिल 400 यूनिट तक हैं। नियमत: उन्हें आधा बिजली बिल माफ होना चाहिए था, लेकिन उनके पिछले बिजली बिल का भुगतान न हो पाने के कारण उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार रियायती बिजली बिल केवल घरेलू उपभोक्ताओं के लिए लागू की गई है, जिसमें 400 यूनिट तक की खपत को इसमें शामिल है। इससे ज्यादा खपत होने पर आधा बिजली बिल माफ होने का लाभ नहीं मिल पा रहा है।हर माह 1 हजार रुपए अधिक भुगतान :
प्राय: यह देखा गया है कि 400 यूनिट तक बिजली का उपयोग करने पर 2 हजार रुपए तक का देयक आता है। जिस पर आधा बिल माफ होने पर बिल 1 हजार रुपए तक का आ रहा है। इस योजना में ध्यान देने योग्य यह है कि बस्तर जिले के करीब सवा लाख घरेलू कनेक्शनों को इसका लाभ नहीं मिलता है। इसका प्रमुख कारण यह है कि जानकारी के अभाव और कई अन्य कारणों के चलते करीब 40 हजार से अधिक उपभोक्ताओं का पिछला देयक बाकी होने से उन्हें इसका लाभ नहीं मिलता है और उनको हर महीने 1 हजार रुपए अधिक देना पड़ रहा है।See also फर्श पर डिलीवरी के मामले में RMO सस्पेंड, मेडिकल ऑफिसर और स्टाफ नर्स पर कार्रवाई की अनुशंसा


