रायपुर। वर्ष 2012 से 2017 के मध्य करीब 9 वर्ष संविदा में ओएसडी के तौर पर पदस्थ रहे समुंदराम सिंहके खिलाफ आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) की टीम ने छापेमारी कर 15 करोड़ रुपए की चल-अचलसंपत्ति का पता लगाया है। फिलहाल ईओडब्ल्यू की विवेचना जारी है। संविदा के पद पर रहने के बावजूदसमुंदराम सिंह ने नियमों को ताक में रखते हुए वित्तीय निर्णय लिए, नोटशीट पर संबंधित मंत्री के अनुमोदनबगैर ही आदेश जारी कर दिए। अपराध से संबंधित दस्तावेज की सूचना प्राप्त होते ही ईओडब्ल्यू की 8 टीमोंने समुंदराम सिंह एवं उनके सहयोगियों के छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश स्थित ठिकानों पर एक साथ रेड किया। 

जांच में क्या मिला :

– बोरियाकला रायपुर में मकान – बिलासपुर में 2 मकान और प्लाट – अनूपपुर में 3 मकान और जमीन – ग्राम बिनौरी मुंगेली में लगभग 10 एकड़ का फार्म हाउस – गौशाला एवं स्वीमिंग पुल के साथ – कैश एवं ज्वेलरी – 2 चारपहिया एवं 3 दोपहिया वाहन – लगभग 20 से अधिक बैंक खातों के दस्तावेज – लगभग 20 इन्श्योरेंस पॉलिसी के दस्तावेज – अनूपपुर मप्र में 40-50 एकड़ का भव्य फार्म हाउस
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राज्य शासन को करोड़ों का नुकसान :

समुंदराम सिंह ने अपनी पदस्थापना के दौरान षड्यंत्रपूर्वक कार्य कर राज्य शासन को करोड़ों की क्षतिपहुंचाने का आरोप है। छत्तीसगढ़ आबकारी नियमों के मुताबिक राज्य शासन को प्रतिवर्ष देशी एवं विदेशीमदिरा के अधिकतम और न्यूनतम रिटेल दर का निर्धारण करने का नियम है। लेकिन वर्ष 2012-13 से2016-17 के मध्य निविदाकर्ताओं को बिना कारण के मुनाफा देते हुए रिटेलरों और ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया। Chhattisgarh से जुड़ी Hindi News के अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर Like करें, Twitter पर Follow करें  और Youtube  पर हमें subscribe करें।