रायपुर। रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम (Rainwater Harvesting System) लगाने में भी रायपुर का नगर निगम पिद्दी साबित हुआ। पिछले 10 सालों में यहां महज 2.5 हजार सिस्टम लगाए गए तो वहीं बेंगलुरू में 2.26 लाख सिस्टम लगाकर 10 अरब लीटर पानी बचा रहा है। तो वहीं रायपुर नगर निगम खाली मटरगश्ती और साइकिलिंग में मस्त है। ऐसे में पानी बचाओ का नारा देकर किनारा करने वाले लोगों को ये रिपोर्ट जरूर देखनी चाहिए। इसके कारण हर साल पानी की समस्या गहराती जा रही है। राजधानी में मेकाहारा जैसी बड़ी बिल्डिंग्स की कोई कमीं नहीं है। जहां पर अगर कायदे से (Rainwater Harvesting System)सिस्टम लगाए गए होते तो भू-जल स्तर इतनी तेजी से नीचे नहीं भागता।
अभियान शुरू कर भूलने की आदत:
रायपुर नगर पालिक निगम को अभियान शुरू कर भूलने की आदत पड़ गई है। यही कारण हैं कि तमाम महत्वाकांक्षी योजनाएं ठंडे बस्ते में चली जाती हैं। हाल ही में आवारा कुत्तों ने जब डीकेएस की बन रही बिल्डिंग में एक बच्ची को नोंच-नोंच कर मार डाला था, तो कुत्तों के स्टेरलाइजेशन की मांग उठी। बैरन बाजार में अस्पताल भी बना मगर आजकल वहां सन्नाटा पसरा हुआ है। निगम ने भी फाइल आलमारी में रख दी है।
बिना वाटर हार्वेस्टिंग लगाए नहीं पास होगा नक् शा:
निगम ने एक बार ये आदेश भी दिया था कि राजधानी में किसी भी मकान का नक् शा तभी पास होगा जब उसमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम (Rainwater Harvesting System)लगाया जाएगा। अगर उसमें सिस्टम नहीं लगाया जाएगा तो ऐसा नक् शा पास नहीं किया जाएगा। वो आदेश भी किसी आलमारी में पड़ा हुआ धूल फांक रहा है। ऐसे में वर्षा जल संभरण की बात इनके सामने करना बेमानी है।
बह रहा वर्षा का पानी ही कुछ कह रहा:
सड़क पर गलियों में नालियों में बह रहा वर्षा का पानी नगर पालिक निगम के अधिकारियों की कारस्तानी की पोल खोल रहा है। कल-कल करता पानी अपनी भाषा में बता रहा है कि आज तो हम नाली-नाले से लेकर सड़क तक बह रहे हैं। कल तुम हमारे लिए तरसोगे।

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