आखिर क्यों हुई आरएसएस में रामलाल की वापसी

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल की आरएसएस(Ramlal returns to rss) में वापसी हो गई। इसे लेकर भीतर ही भीतर नई दिल्ली से रायपुर तक हलचल तेज हो गई हैं। ऐसा करना इस लिए जरूरी माना जा रहा है क्योंकि आरएसएस (rss)को दक्षिण भारत में अपना संगठन मजबूत करना है। इसके लिए पुराने अनुभवी रामलाल(Ramlal) जैसे काबिल कार्यकर्ताओं की जरूरत पड़ेगी। विजयवाड़ा आंध्र प्रदेश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(rss) के प्रचारकों की तीन दिवसीय बैठक 11 से 13 जुलाई तक हुई। उसमें और भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। इससे ऐसा प्रतीत होता है भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से 15 जुझारू प्रचारकों को भारतीय जनता पार्टी में भेजने के लिए जो अनुरोध किया गया था, उसकी वो मांगें मान ली गई हैं। इन प्रचारकों की भारतीय जनता पार्टी में केंद्र में एवं राज्यों में संगठन मंत्री के रूप में नियुक्त किया जाएगा ।
बीएल संतोष बने नए महासचिव:
भारतीय जनता पार्टी के संयुक्त महासचिव बीएल संतोष को पार्टी के संगठन राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया है। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने बीजेपी के संयुक्त महासचिव बीएल संतोष को राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया है।
खुद ही पत्र लिखकर किया था अनुरोध:
संघ के वरिष्ठ प्रचारक रहे रामलाल को 2006 में भाजपा महासचिव (संगठन) बनाया गया था। वह लगातार 13 वर्षों तक इस पद पर रहे।
रामलाल ने साल 2017 में भी पदमुक्त करने का आग्रह किया था, लेकिन तब पार्टी ने लोकसभा चुनावों की तैयारी शुरू होने से उनका आग्रह स्वीकार नहीं किया था। इसके बाद उन्होंने इस महीने की 5 जुलाई को फिर से भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को पत्र लिखकर पदमुक्त करने का आग्रह किया था।
आखिर क्यों किया गया ऐसा:
भीतरी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विजयवाड़ा की बैठक में तय किया गया है कि केंद्र से लेकर राज्य तक भारतीय जनता पार्टी 50 वर्ष से 55 वर्ष तक के उम्र वालों सक्रिय सदस्यों को पार्टी पदाधिकारी बनाए,जिससे संगठन में 10 से 15 वर्षों तक सक्रिय रूप से काम कर सकें और पार्टी को मजबूत कर सकें।
दक्षिण भारत में संगठन को मजबूत करने की कवायद:
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मानना है उत्तर भारत में भारतीय जनता पार्टी बहुत हद तक मजबूत हो गई है । अब दक्षिण राज्य में आरएसएस एवं भारतीय जनता पार्टी को ग्राम स्तर से लेकर जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन को मजबूत करना है। जब तक दक्षिण भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह मजबूत नहीं होगी, नई दिल्ली में केंद्र की सरकार ताकतवर नहीं हो सकती । ऐसे में अब देखना ये होगा कि इस मामले पर आगे क्या निर्णय सामने आता है।

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