रायपुर। छत्तीसगढ़ में 19 बाघ जिंदा (tigers alive) बचे हैं। आज टाइगर्स डे (world tigers day) के मौके पर ये जानकारी पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ (PCCF Wild Life) अतुल शुक्ला ने दी। वहीं अकेले भिलाई के मैत्री गार्डन में 8 बाघ बताए जा रहे हैं। बाघों की खराब हालत के लिए यहां का वन विभाग जिम्मेदार है, अगर शिकार पर रोक नहीं लगाई गई तो ये 19 भी कितने दिन बचेंगे कह पाना मुश्किल है।पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में कुल 1 हजार बाघ बताए जा रहे हैं। तो वहीं कान्हा नेशनल पार्क में बाघों के 31 शावक मौजूद हैं।

वनों में धड़ल्ले से हो रहा बाघों का शिकार:

अक्सर बाघों की हड्डियां, खालें और शरीर के तमाम दूसरे हिस्से बरामद होना इस बात के संकेत देता है कि प्रदेश में बाघों का शिकार हो रहा है। ऐसे में उनकी वंश वृध्दि की उम्मीद रखना बेमानी है। तो वहीं प्रदेश का वन विभाग भी बाघों को लेकर गंभीर नहीं है। ऐसे में अगर राज्य में बाघों का कुनबा बढाÞना है तो फिर राज्य सरकार और वन विभाग दोनों को प्रयास करने होंगे।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण में वन्य जीव प्रेमी नितिन सिंघवी ने टाइगर्स डे (world tigers day) के मौके पर  बताया है कि 2006 से 2017 के मध्य उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व इंद्रावती टाइगर रिजर्व और कांकेर में लगभग 15 बाघ के खालें बरामद हो चुकी हैं। वहीं इसी टाइगर रिजर्व में भी एक बाघ की खाल बरामद हुई थी। ऐसे में अब कोई कैसे विश्वास करेगा कि राज्य में अभी भी इतने बाघ जिंदा बचे हैं?

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मैत्री गार्डन में कैसे बढ़ा बाघों का कुनबा:
जानकार बताते हैं कि 1997 में भुवनेश्वर से तरुण और ताप्ती को यहां लाया गया था। ये दोनों ही सफेद बाघ बताए जा रहे हैं। इस वक्त इनका परिवार बढ़कर 22 हो चला है। मध्य भारत में मैत्री गार्डन ही एक मात्र ऐसी जगह है जहां बाघ सुरक्षा घेरे में आजाद घूमते हैं। यही कारण है कि हर साल यहां 12 लाख से ज्यादा पर्यटक आते हैं।

मैत्रीबाग में क्या है अभी बाघों की स्थिति:
मैत्रीबाग से अब तक करीब 12 सफेद बाघों को 5 चिडिय़ा घरों में दिया जा चुका है। इसके बाद 8 सफेद बाघ जू में है। विश्व में जब बाघ को बचाने जतन जारी है। तब मैत्रीबाग ने इस दिशा में बेहतर काम किया है। यहां बीडिंग अन्य जू से बेहतर है, यह बार-बार साबित होता रहा है।
यूके्रन से देखने आए पर्यटक:
यूक्रेन के पर्यटक मैत्रीबाग के इन सफेद बाघ को देखने पहुंचे, तो मैत्रीबाग के इंचार्ज डॉक्टर एनके जैन ने उनको सफेद बाघ के संबंध में संरक्षण को लेकर किए जा रहे काम की जानकारी दी।
देश में बचे सिर्फ 3891 बाघ :
वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड और ग्लोबल टाइगर फोरम के 2016 के आंकड़ों के मुताबिक विश्व में करीब 6000 बाघ ही बचे हैं, जिनमें से 3891 बाघ भारत में मौजूद हैं। विश्व में बाघों की 6 प्रजातियां प्रमुख हैं, जिनमें बंगाल टाइगर, साइबेरियन बाघ, इंडोचाइनीज बाघ, मलायन बाघ, सुमात्रा बाघ, साउथ चाइना बाघ प्रमुख हैं।

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