नई दिल्ली।  बड़बोले पाकिस्तान को फाइनेंशियल एक् शन टास्क फोर्स(Financial action task force) (FATF)ने काली सूची(Black list) में डाल दिया है। इसके पीछे का कारण ये है कि पाकिस्तान फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स एशिया-पैसिफिक ग्रुप ( (FATF)- APG) के मानकों पर खरा नहीं उतरा। पाक एशिया-पैसिफिक ग्रुप (APG) के 10 मानकों को पूरा करने में नाकाम साबित हुआ है। ऐसे में अब पाकिस्तान के विश्व बैंक से लोन पाने के भी रास्ते बंद हो जाएंगे। इस देश को कोई आर्थिक सहायता भी नहीं मिलेगी।

पाकिस्तान के साथ क्यों हुआ ऐसा:

एपीजी की अंतिम रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान अपने कानूनी और वित्तीय प्रणालियों के लिए 40 मानकों में से 32 को पूरा करने में विफल रहा है। इसके अलावा टेरर फंडिंग के खिलाफ सुरक्षा उपायों के लिए 11 मापदंडों में से 10 को पूरा करने में पाकिस्तान विफल साबित हुआ। अब पाकिस्तान अक्टूबर में ब्लैक लिस्ट हो सकता है, क्योंकि एफएटीएफ की 27-पॉइंट एक्शन प्लान की 15 महीने की समयावधि इसी साल अक्टूबर में खत्म हो रही है।

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आस्ट्रेलिया के कैनबरा में होगी बैठक:

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (Financial action task force )(FATF) की आस्ट्रेलियाई शहर कैनबरा में बैठक होगी। यहां पाकिस्तान से जुड़ी म्युचुअल इवेल्यूशन रिपोर्ट (GME) पेश होने के बाद स्वीकार की जानी है। इससे पहले पाकिस्तान ने बुधवार को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स(Financial action task force) को अनुपालन रिपोर्ट सौंपी। इसमें 27 सूत्री कार्ययोजना (Action  Plan) का उल्लेख है।

इस्लामाबाद की रिपोर्ट में क्या मिला:

इस संबंध में एपीजी ने पाया कि इस्लामाबाद की ओर से कई मोर्चों पर खामियां हैं। साथ ही उसने मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग को रोकने के लिए पाकिस्तान की ओर से की जा रही कोशिशों में कई तरह की खामियां पाई हैं। पाकिस्तान की ओर से 50 पैमानों पर सुधार के दावों को लेकर कोई समर्थन नहीं मिल रहा। नौ देशों के इस क्षेत्रीय संगठन एपीजी में पाकिस्तान 40 पैमानों में करीब तीन दर्जन पैमानों में नाकाम रहा है। इसके अलावा 11 ‘‘प्रभावकारी’’ पैमानों पर भी पाकिस्तान 10 में फिसड्डी साबित हुआ है।
पाकिस्तान को एमईआर और फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स( Financial action task force)एक्शन प्लान, दोनों मोर्चों पर असरदार अनुपालन दिखाना है। अक्टूबर में ऋअळऋ के पूर्ण सत्र में पाकिस्तान के मामले की अंतिम समीक्षा की जाएगी।

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जून 2018 से ही संदिग्ध सूची में था पाकिस्तान:

अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इंग्लैंड के दबाव के बाद फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (Financial action task force) पाकिस्तान को जून 2018 से संदिग्ध सूची में डाल चुका है। एपीजी की ओर से पाकिस्तान के खिलाफ प्रतिकूल तथ्य पाए जाने के बाद अक्टूबर 2019 से उसे नकारात्मक रडार पर रखा जाएगा। इसके मायने हैं कि पाक के लिए दिक्कतें और बढ़ेंगी। वो संदिग्ध सूची में बना रहेगा और उसे काली सूची में डालने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। यह पाकिस्तान के लिए एक बहुत बड़ा झटका होगा।

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