टीआरपी डेस्क। महज तीन महीने पहले थाईलैंड की महारानी बनी सिनीनात को बेवफाई की ऐसी

सजा मिली जिसे जानकर आप चौंक जाएंगे। आपको बता दें कि थाईलैंड के राजा महा वजीरालॉन्गकोर्न

ने अपनी 34 वर्षीय आधिकारिक सहयोगी सिनीनात वोंग वचिरापाक के ओहदे और शाही पदनाम

वापस ले लिए हैं। राजा ने उनके सभी शाही पदनाम, सम्मान, रॉयल गार्ड में उनके दर्जे और सेना में

उनकी रैंक को वापस लेने का आदेश दिया है। सिनीनात को उनके दुर्व्यवहार और सम्राट के साथ

बेवफाई करने की वजह से अहम पद से हटा दिया गया है।

 

इस वजह से नाराज था शाही परिवार :

शाही परिवार की तरफ से की गई आधिकारिक घोषणा में कहा गया है कि सिनीनात ‘महात्वाकांक्षी’

महिला थीं और उन्होंने खुद को को रानी के ओहदे के समकक्ष पदोन्नत करने की कोशिश की।

सम्राट की सहयोगी के बर्ताव को अपमानजनक माना गया। उनकी नियुक्ति जुलाई में हुई थी। इसके

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सिर्फ दो महीने पहले थाईलैंड के राजा ने 41 वर्षीय रानी सुतिदा से शादी की थी, जो उनकी चौथी

पत्नी हैं। वो थाईलैंड के राजा महा वाचिरालोंगकोन की बॉडीगार्ड यूनिट की उप प्रमुख रही थीं। वो

फ्लाइट अटेंडेंट भी रह चुकी हैं और बरसों से सार्वजनिक जगहों पर राजा के साथ दिखाई देती रही हैं।

पायलट से लेकर महारानी बनने तक का सफर :

प्रशिक्षित पायलट और नर्स सिनीनात मेजर जनरल रह चुकी हैं। बीती करीब एक शताब्दी के दौरान

‘रॉयल नोबल कन्सॉर्ट’ पदनाम हासिल करने वाली वो पहली शख्सियत थीं। मगर, सोमवार को उनके

पतन की खबर राष्ट्रीय मीडिया में दिखाई गई। सिनीनात के पदनाम वापस लेने से जुड़ी घोषणा

सोमवार को राजपत्र में प्रकाशित हुई। वो अर्से से राजा की करीबी थीं। राजा की सुतिदा से शादी के

बाद भी सिनीनात शाही कार्यक्रमों की नियमित मेहमान रहती थीं। बीते दिनों छोटे बालों के साथ

सिनीनात की राजा का हाथ पकड़े हुए एक तस्वीर भी मीडिया में सामने आई थी।

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चार शादियां की हैं थाईलैंड के राजा ने :

थाईलैंड के राजा ने चार शादियां की हैं। उनकी पत्नियों के नाम राजकुमारी तोम्सवली (1977 से 1993),

युवाधिदा (1994 से 1996), सीरात (2001 से 2014) और रानी सुतिदा हैं। थाईलैंड के कानून के मुताबिक

सम्राट के किसी भी तरह के अपमान पर रोक है। इस मामले में थाईलैंड का कानून दुनिया में सबसे सख्त है।

साल 2016 में पिता भूमिबल की मौत के बाद महा वाचिरालोंगकोन राजगद्दी पर बैठे थे। पिता के उलट

वर्तमान राजा अपनी प्रजा से जरा दूरी बनाकर ही चलते हैं और अपना अधिकांश समय विदेश में खासतौर

पर जर्मनी में बिताते हैं।

 

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