टीआरपी डेस्क। हमारे देश में अगर कोई समस्या तेजी से बढ़ रही है तो वो है बेरोजगारी की। इस बेरोजगारी की समस्या का बुरा असर हमारी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन के आंकड़े यह बताते हैं कि भारत में 2018 में बेरोजगारी दर 6.1 प्रतिशत थी।

बेरोजगारी दर से मतलब होता है कामकाजी आयु वर्ग में से कितने लोग एक तय समय में रोजगार की तलाश कर रहे थे, लेकिन उन्हें काम नहीं मिल सका। 2018 में सबसे ज्यादा बेरोजगारी दर 10.8 प्रतिशत शहरी महिलाओं में पाई गई। इसके बाद यह शहरी भारत में पुरुषों में 7.1 प्रतिशत, ग्रामीण पुरुषों में 5.8 प्रतिशत और ग्रामीण महिलाओं में 3.8 प्रतिशत पाई गई।

ये आंकड़े सहीं हैं या भ्रामक आइये समझते हैं

देखा जाए तो ये आंकड़े स्वयं में भ्रामक हैं, क्योंकि भारत में न तो कड़ाई से न्यूनतम मजदूरी दर लागू होती है और न ही काम करने के घंटे पर कोई अंकुश होता है। पूर्णत: बेरोजगार लोगों के अलावा भारत का एक और बड़ा हिस्सा वह भी है जो बहुत कम मजदूरी या फिर अनुबंध पर काम करता है। इसके अलावा वह तबका भी है जो उचित रोजगार के अभाव में कम समय के लिए किसी न किसी व्यावसायिक इकाइयों से जुड़ जाता है।

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इन विकसित देशों में भी है बेरोजगारी की समस्या

यह भी एक आंशिक बेरोजगारी है जो औपचारिक आंकड़ों में नहीं दिखती। यहां यह भी बताना आवश्यक है कि बेरोजगारी केवल भारत में ही नहीं, बल्कि कई विकसित देशों की भी समस्या है। फ्रांस में बेरोजगारी दर 8.8 प्रतिशत, इटली में 10.7 प्रतिशत, स्पेन में 18.6 प्रतिशत और अमेरिका में 4.4 प्रतिशत है।

हालांकि यह दर चीन में 3.6 प्रतिशत और जापान में 2.6 प्रतिशत है। इसकी एक वजह यह है कि जापान और चीन में युवाओं का प्रतिशत भारत की तुलना में कम है। वैसे तो बेरोजगारी के कई कारण हैं, लेकिन इसमें संदेह नहीं कि बेरोजगारी की समस्या की जड़ हमारी शिक्षा प्रणाली है, चाहे वह औपचारिक शिक्षा हो या अनौपचारिक।

82 प्रतिशत भारतीय इंजीनियरों के पास मूलभूत कौशल नहीं

एक रिपोर्ट की मानें तो भारत हर साल सबसे अधिक संख्या में इंजीनियर तैयार करने के लिए जाना जाता है, लेकिन सच्चाई यह भी है कि 82 प्रतिशत भारतीय इंजीनियरों के पास वह मूलभूत कौशल नहीं है जिसकी आज के तकनीकी युग में आवश्यकता है। बेरोजगारी की समस्या में हमारी अर्थव्यवस्था की भी भूमिका है।

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आर्थिक विकास मॉडल कुछ महानगरों पर केंद्रित

हमारा आर्थिक विकास मॉडल कुछ महानगरों पर केंद्रित है। देश के चुनिंदा 8-10 महानगरों के अलावा अन्य इलाकों में नौकरियों के बहुत कम अवसर पैदा हो रहे हैं। इसकी वजह से छोटे शहरों से निकलने वाले युवाओं को भी अपनी पहली नौकरी महंगे महानगरों में ढूंढनी पड़ती है। बढ़ती बेरोजगारी का एक बड़ा कारण हमारे गांवों की स्थिति भी है।

कृषि क्षेत्र मंदी के लंबे दौर से गुजर रहा

हमारा कृषि क्षेत्र मंदी के लंबे दौर से गुजर रहा है। 1993 से 2016 तक किसानों की आय में दो प्रतिशत से भी कम की सालाना बढ़ोतरी हुई है। हालांकि कृषि रोजगार का एक बड़ा जरिया है, लेकिन कृषि क्षेत्र में चल रही निरंतर मंदी के कारण शायद ही कोई युवा उसे करियर के रूप में चुनना चाहेगा।

निराश युवा किसान भी बेरोजगारी के आंकड़ों में

जाहिर है कि निराश युवा किसान भी बेरोजगारी के आंकड़ों में दिखेंगे। बेरोजगारी का एक अन्य कारण तकनीकी बदलाव भी है। पिछले तीन-चार दशकों में तकनीक के क्षेत्र में काफी तेज विकास हुआ है। आज अधिकतर कंपनियां अपने कॉल सेंटरों पर इंसान नहीं, कंप्यूटर का प्रयोग कर रही हैं। टैक्सी बुक करने से लेकर खाना और सामान मंगाने का कार्य एप से हो रहा है।

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एक रोबोट कर रहा है छह इंसानों का काम

औद्योगिक क्षेत्र में ऑटोमेशन या एक रोबोट छह इंसानों का काम अकेले कर सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि 2030 तक विश्व भर में 80 करोड़ लोगों की नौकरियां रोबोट द्वारा ले ली जाएंगी। बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों जैसे कि जर्मनी और अमेरिका में एक तिहाई कर्मचारियों की नौकरी रोबोट के हाथों में चले जाने का अनुमान है। यही प्रवृत्ति भारत और अन्य विकासशील देशों में भी दिखेगी।

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