उचित शर्मा

दिल्ली से आए नतीजों ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है कि सकारात्मक प्रचार और पांच सालों के किए गए काम से जनता आपको पुन: चुनाव जीता देती है। जहां केजरीवाल अपने समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ अपनी उपलब्धियों के आधार पर जनता से वोट मांगा वहीं केंद्र की सत्ता में काबिज दल के नेताओं ने राष्ट्रीय मुद्दों पर जनता से समर्थन मांगा, परन्तु मानवीय मूलभूत जरूरत शिक्षा, स्वास्थ, सुरक्षा, बिजली, पानी, वाई.फाई जैसे मुद्दों ने राष्ट्रीय मुद्दों को नकार दिया, जो भी परन्तु केजरीवाल ने बड़े कद के नेताओं को बता दिया कि काम बोलता है।

कांग्रेस का खाता ना खोल पाना कांग्रेस के लिए अलार्म है, राष्ट्रीय नेताओं को चिंतन करना होगा। क्योंकि, राजधानी से संदेश पूरे देश में जाता है। भाजपा नेताओं की भाषा चुनाव के दौरान गरिमा के प्रतिकूल थी, पर केजरीवाल अपनी टीम के साथ बिना प्रतिक्रिया के धैर्य से अपना प्रचार.प्रसार करते रहे।

इस चुनाव में मनीष सिसोदिया बड़ी मुश्किल से जीते यदि वो पराजित होते तो इतने प्रचंड बहुमत के बावजूद जीत अधूरी रहती, क्योंकि सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के लिए उन्हें सदैव याद किया जाएगा। ​

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बड़बोले कपिल मिश्रा और ट्वीटर किंक ​तेजिंदरपाल बग्गा की हार अवश्य संभावी थी। सोशल मीडिया से आप पहचान बना सकते हैं पर विधानसभा में सदस्यता नहीं ले सकते। सहयोगी पार्टी राजद, जेडीयू और लोजपा तो अपनी फजीहत कराने चुनाव में भाग ले रही थी, नतीजों को देख यही लगता है।

चुनाव के बाद केजरीवाल पर 2 करोड़ जनता के भरोसे पर खरा उतरने की चुनौती होगी, वहीं भाजपा को चिंतन करना होगा कि रिंकिया के पापा के भरोसे पार्टी मजबूत होगी या डाक्टर हर्षवर्धन जैसे उच्च शिक्षित व सम्मानीय व्यक्ति को पार्टी का चेहरा बनाकर वापसी करना चाहेेंगे।

कांग्रेस के लिए निरंतर जनता से संपर्क में रह अपनी जमीन मजबूत करना ही विकल्प होगा। हालांकि भाजपा का 7 प्रतिशत वोट बढ़ना और 4 सीटें और जीतना उनके प्रवक्ताओं को तर्क़.वितर्क करने का मौका देगी। परिणाम जो भी पर अब देश की राजधानी को बेहतर बनाने के लिए सभी को पूर्ण योगदान देना चाहिए।

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