सूरत में बच्ची से दुष्कर्म व हत्या का मामला

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या के दोषी की फांसी पर रोक लगा दी है। दोषी को ट्रायल कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे हाईकोर्ट ने बरकरार रखा। हाईकोर्ट के फैसले के बाद 60 दिन का वक्त गुजरने से पहले ही सेशंस कोर्ट ने डेथ वॉरंट जारी कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को डेथ वॉरंट को दोषपूर्ण बताते हुए कहा कि हम यह जानना चाहते हैं कि ट्रायल कोर्ट इस तरह की गलती कैसे कर सकता है, जबकि, इस बारे में 2015 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक गाइडलाइन मौजूद है।

दोषी अनिल यादव ने 14 अक्टूबर 2018 को सूरत में पड़ोस में रहने वाली साढ़े तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी थी। इस मामले में सेशंस कोर्ट ने 31 जुलाई 2019 को उसे फांसी की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने भी उसकी सजा बरकरार रखी।

See also  लाल किला हिंसा का आरोपी और पंजाबी अभिनेता दीप सिद्धू की सड़क हादसे में मौत

इसके बाद सेशंस कोर्ट ने डेथ वॉरंट जारी कर उसे 29 फरवरी को सुबह 6 बजे अहमदाबाद की साबरमती जेल में फांसी देने का आदेश दिया। दोषी ने सजा के खिलाफ 14 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

कोर्ट ने कहा- किसी की जवाबदेही तय हो

सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एसए बोवडे की बेंच ने कहा, “इस मामले में किसी की जवाबदेही तय होनी चाहिए। न्याय प्रक्रिया को इस तरह संचालित करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।” इसके बाद बेंच ने दोषी अनिल यादव की फांसी पर अगले आदेश तक रोक लगा दी।

बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस तरह डेथ वॉरंट जारी करने की वजह पूछी, तो मेहता ने कहा- कानून की जानकारी के अभाव में किसी जज को ऐसे फैसले नहीं लेना चाहिए।

सरकार ने दोषी को वकील मुहैया कराया

दोषी अनिल के कानूनी मदद मांगने पर सरकार ने अपराजिता सिंह को उसका वकील नियुक्त किया था। सिंह ने कहा- सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के लिए उनके पक्षकार के पास अभी 60 दिन का समय है। इससे पहले डेथ वॉरंट जारी नहीं किया जा सकता।

See also  अब डीजल गाड़ियां खरीदना पड़ेगा महंगा, 10 फीसदी जीएसटी लगाने की तैयारी

चीफ जस्टिस ने इस दलील को मानते हुए कहा- जब तक सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल नहीं होता, तब तक डेथ वॉरंट जारी नहीं किया जा सकता। कानून के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी दोषी के पास राष्ट्रपति को दया याचिका भेजने का विकल्प मौजूद है। अगर दया याचिका खारिज हो जाए, तो फिर सुप्रीम में अपील की जा सकती है। पूरी प्रक्रिया के बाद ही डेथ वारंट जारी किया जा सकता है।

दोषी ने बच्ची से दरिंदगी कर उसकी हत्या की थी

साढ़े 3 साल की बच्ची से 14 अक्टूबर 2018 को दुष्कर्म करने के बाद दोषी अनिल ने उसके सिर में डंडा मारकर और गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी थी। 15 अक्टूबर को बच्ची का शव बरामद हुआ था, जबकि दोषी को पांच दिन बाद पुलिस ने 19 अक्टूबर को बिहार के घनसोई गांव से गिरफ्तार किया था।

जनवरी 2019 के अंतिम सप्ताह में मामले में सुनवाई शुरू हुई थी। पुलिस ने 23 दिन बाद 4 नवंबर को चालान पेश किया था और 108 दिन बाद आरोप तय किए गए थे।

See also  सुप्रीम कोर्ट ने सिविल सेवा परीक्षा को लेकर यूपीएससी और केंद्र को जारी किया नोटिस, इस दिन होगी मामले की अगली सुनवाई

इन धाराओं के तहत सजा हुई थी

अदालत ने उसे धारा 302 में फांसी, 366 में दस साल, 376 एबी में फांसी, 377 में दस साल, 201 में सात साल, पोक्सो-3 ए, पोक्सो-5 एम, पोक्सो-4, पोक्सो-6 और पोक्सो-8 में फांसी की सजा सुनाई थी।

 

Chhattisgarh से जुड़ी Hindi News के अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें 

Facebook पर Like करें, Twitter पर Follow करें  और Youtube  पर हमें subscribe करें।