उचित शर्मा

प्रदेश की राजधानी में बहुचर्चित और विवादस्पद एक्सप्रेस.वे के मामले में सरकार ने कार्यपालन अभियंता और अन्य अधीनस्थ संबंधित अभियंताओं पर निलंबन की कार्यवाही की। जिस एक्सप्रेस वे का निर्माण तत्वरित गति से पूरा कर शहर की गति और सुलभ यातायात के उद्देश्य को पूर्ण करना था, वो अभी लोकपर्ण के पूर्व ही अनुरक्षण (मेंटेनेंस) की अवस्था में आ गया।
एक्सप्रेस वे की चर्चा राज्य के सबसे बड़े फोरम विधानसभा में भी जोरशोर से हुई। माननीय सदस्य के आग्रह पर माननीय मंत्री जी ने तत्काल विधानसभा से ही निलंबन का मौखिक आदेश दे दिया। अब सवाल यह उठता है, कि सिर्फ वो अभियंता ही जिम्मेदार हैं,वो नहीं जिन्होंने उन्हें दूसरे विभागों से प्रतिनियुक्ति पर बिना संबंधित अनुभव के रखने अनुशंसा की, अनुमोदन करने वाला अधिकारी जो राजनीतिक दवाब के सामने अपने प्रशासनिक दायित्वों का निर्वाह नहीं कर पाए। इसकी जॉंच की रिपोर्ट भी सार्वजनिक की जानी चाहिए, जिससे आम जनता को सच का पता चल सके जो उनका अधिकार है।

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पूर्व मंत्री जो सदा गुणवत्ता और कार्यावधि का जिक्र कर निपटने, टांगने, फेंकने की बात करते थे, उनकी जिम्मेदारी भी बनती है। निर्माण कार्य का श्रेय लेने पुरस्कार लेने में अव्वल रहने वाले पूर्व मंत्री की न सिर्फ नौतिक जिम्मेदारी है, बल्कि ये उनकी अक्षमता भी दिखता है। राज्य की जनता चाहती है उन ठेकेदार और आँखें मूंद कर निर्माण सामग्री और कार्य गुणवत्ता को सही बताने वाले अभियंता और अपने को श्रेष्ठ निर्माण कर्ता बताने वाले मंत्री जी एवं अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को भी दण्डित किया जाए, तब लगेगा कि सरकार ने न्याय किया है, अन्यथा जनता तो कष्ट सहकर भी मौन धारण रखती है, पर ध्यान रखना चाहिए कि ये वो जनता है, जो सत्ताधारीयों को अर्श से फर्श पर भी पटक सकती है।