नई दिल्ली। कोरोना वायरस का प्रकोप पूरी दुनिया में काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है। भारत में भी इस वायरस का कोहराम जारी है। वहीं, तबलीगी जमात के कारण कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में अचानक काफी इजाफा हुआ है। देश में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा पांच हजार के पार पहुंच चुका है, जबकि 166 लोगों की मौत हो चुकी है। इसी बीच तबलीगी जमात को लेकर दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बड़ा खुलासा किया है। क्राइम ब्रांच का कहना है कि निजामुद्दीन स्थित मरकज में विदेश से हर दिन चार से पांच हजार लोग जुटते थे।

क्राइम ब्रांच का कहना है कि मरकज में आने वाले लोगों से उनका देश और मरकज में आने का कारण पूछा जाता था। इस मामले में क्राइम ब्रांच ने मरकज से जुड़े लोगों से पूछताछ भी शुरू कर दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस अब भी फोन से ही पूछताछ कर रही है। कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए पुलिस अधिकारी सामने बैठाकर पूछताछ से परहेज कर रहे हैं। क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि अब तक दस से ज्यादा लोगों से पूछताछ हो चुकी है। ज्यादातर ने वही बात बताई है, जो यहां से बरामद रजिस्टरों में लिखी है। रजिस्टरों में सबसे अहम कॉलम मरकज में आने का कारण है। विदेशों से आने वाले लोगों का अलग रजिस्टर बनाया जाता था। ज्यादातर लोगों ने पूछताछ में भी कहा है कि मरकज में आने का कारण पूछा जाता था।

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पुलिस का कहना है कि जो लोग जमात के लिए आते थे, उन्हें मरकज में रोका जाता था। बाकी लोगों को वापस भेज दिया जाता था। मरकज में जमात 1927 से शुरू हुई थी। अपराध शाखा के एक अधिकारी ने बताया कि मरकज के मौलाना मोहम्मद साद के अलावा अन्य छह पदाधिकारियों, जिनका एफआईआर में नाम है उन्हें भी नोटिस भेजा गया है। एफआईआर में मोहम्मद अशरफ, मुफ्ती शहजाद, डॉ. जीशान, मुरसालीन सैफी, मो. सलमान और यूनुफ का नाम है। दूसरा नोटिस भेजकर इनसे भी और सवाल पूछे गए हैं। पुलिस ने दूसरे नोटिस का जवाब जल्द ही मांगा है। ये सभी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजी जा रही है।

गौरतलब है कि देश में काफी संख्या में तबलीगी जमात के लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं और कई की तलाश जारी है। वहीं, क्वारंटाइन किए गए तबलीगी जमात के लोग पुलिस, हॉस्पिटल प्रशासन के साथ काफी बदसलूकी भी कर रहे हैं।

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