रायपुर। कोरोना लॉकडाउन की वजह से विदेशों में पढ़ाई कर रहे छत्तीसगढ़ के छात्रों आॅपरेशन वंदे मातरम के तहत देश में वापस लाए जाने की पहल केंद्र सरकार द्वारा की जा रही है। भारत सरकार का विदेश मंत्रालय उन देशों की सरकार के संपर्क में जहां से इन छ़ात्रों को वापस लाया जाना है।

इनमें छत्तीसगढ़ के 500 से ज्यादा छात्र शामिल हैं, अकेल रायपुर सिटी में ही करीब 70 छ़ात्र ऐसे हैं जिन्हें छत्तीसगढ़ वापस लाया जाना है। लेकिन इन छात्रों की वापसी में छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्र सरकार में तालमेल नहीं होने से इन छात्रों को 28 दिनों के लंबे क्वारेंटाइन से गुजरना पड़ सकता है।


स्क्रीनिंग के बाद दिल्ली फिर छत्तीसगढ़ में दोबारा क्वारेंटाइन करने को बना हुआ भ्रम

बता दें विदेशों में लौटने वाले छत्तीसगढ़ के छात्रों को क्वारेंटाइन के दौरान किन प्रक्रिया से गुजरना होगा, इसे लेकर पालकों में प्रदेश सरकार व केंद्र के निर्देशों के भ्रम बना हुआ है। अगर दिल्ली और छत्तीसगढ़ में अलग.अलग क्वारेंटाइन होना पड़ा तो इन्हें 14.14 दिनों के दो क्वारेंटाइन यानि 28 दिन अकेले गुजारने होंगे।

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छ़ात्रों की इस परेशानी को लेकर इनके पालकों ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात कर इन्हें छत्तीसगढ़ में ही क्वारेंटाइन करने की गुहार लगाई है। पालकों का कहना है कि वे क्वारेंटाइन के दौरान सभी शर्तों को पूरा करने को तैयार हैं। पालकों से सीएम से गुहार लगाई है कि विदेशों में कोरोना संक्रमण से लगातार हो रही मौतों से ये बच्चे पहले से ही डरे हुए हैं, अगर अपने देश लौटने पर इन्हें 28 दिनों का क्वारेंटाइन गुजारना पड़ेगा तो ये डिप्रेशन में जा सकते हैं।

पालकों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से गुहार लगाई है कि इन छ़ात्रों की स्वदेश वापसी पर छत्तीसगढ़ के क्वारेंटाइन सेंटरों में 14 दिन रखा जाए। ताकि वो निर्धारित क्वारेंटाइन पीरियड को गुजार सकें। इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार तक अनुरोध प्रस्ताव भेजे जाने की अपील की है।


6 राज्यों ने पहले ही भेज दिए हैं ​केंद्र को प्रस्ताव

बता दें कि आॅपरेशन वंदे मातरम के तहत विदेशों में रह रहे छ़ात्रों को अपने अपने राज्यों क्वारेंटाइन के लिए 6 राज्यों ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव पहले ही भेज दिया है। केंद्र सरकार ने इन छात्रों को अपने गृह राज्य में ही क्वारेंटाइन करने मंजूरी भी दे दी है। बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार की ओर ऐसा प्रस्ताव अभी केंद्र को नहीं भेजे जा सके हैं, यही वजह है कि ये छात्र और इनके पालक उनकी सुरक्षित वापसी के लिए मुख्यमंत्री से गुहार लगा रहे हैं।

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