टीआरपी न्यूज/रायपुर। छत्तीसगढ़ के लाडले सपूत अजीत जोगी अब हमारे बीच नहीं रहे। 74 वर्ष की उम्र में अजीत जोगी ने देवेंद्र नगर स्थित नारायणा अस्पताल में आखिरी सांस ली। उनका अंतिम संस्कार कल गौरेला में किया जायेगा। आइये हम आपको बताते हैं अजीत जोगी के जीवन से जुडी खास बातों के बारे में।

अजीत जोगी भोपाल के MACT (MANNIT) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करके कुछ दिन रायपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में अध्यापन का काम किया। 1968 में UPSC में सफल हुए और IPS बने। दो साल बाद ही वे IAS सिलेक्ट हुए। वे 14 साल मध्यप्रदेश में कलेक्टर रहे। ज्यादातर नियुक्ति उन्हीं जिलों में मिली, जो राजनीतिक क्षत्रपों के प्रभाव क्षेत्र माने जाते रहे।

वे इंदौर कलेक्टर तब रहे जब तत्कालीन मध्यप्रदेश में प्रकाश चंद सेठी सीएम थे। वहां सेठी की छत्रछाया रही। रायपुर में भी कलेक्टर का पद मिला, जो शुक्ला बंधुओं के प्रभाववाला क्षेत्र था। सीधी पोस्टिंग रही, जो अर्जुन सिंह का क्षेत्र था। वहां उनकी नजदीकियां हो गईं। ग्वालियर में भी कलेक्टर रहते हुए उनकी नजदीकियां माधवराव सिंधिया घराने से हो गई थी।

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रायपुर में कलेक्टर रहते राजीव गांधी से ऐसे बढ़ीं नजदीकियां

जोगी जब रायपुर में कलेक्टर थे, उस समय राजीव गांधी के संपर्क में आए। जब राजीव गांधी रायपुर रुकते थे तो एयरपोर्ट पर जोगी खुद उनकी आवभगत के लिए पहुंच जाते थे। बताया जाता है कि इस खातिरदारी ने उन्हीं राजनीतिक की टिकट दिला दी।

14 साल कलेक्टर रहने का रिकार्ड

अजीत प्रमोद कुमार जोगी का जन्म 29 अप्रेल 1946 को बिलासपुर के पेंड्रा में हुआ। 1968 में वे आईपीएस हो गए और दो साल बाद आईएएस। लगातार 14 साल तक जिलाधीश बने रहे जो अपने आपमें एक रिकार्ड है।

ऐसे शुरू हुआ राजनीति का सफर

इंदौर से ही वे IAS छोड़कर राज्यसभा में चले गए। कांग्रेस प्रवक्ता रहने के साथ ही जोगी दो बार राज्यसभा के सदस्य बने। 1998 में रायगढ़ से चुनाव लड़कर पहली बार लोकसभा पहुंचे। लेकिन, 1999 में वे शहडोल से चुनाव हार गए थे। नवंबर 2000 में छत्तीसगढ़ गठन के दौरान उनके राजनीतिक जीवन में बड़ा बदलाव आया और उन्हें छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला। अपने तेवरों और विवादों के कारण वे सबसे चर्चित मुख्यमंत्री भी रहे। साल 2003 में भाजपा के रमन सिंह के सत्ता में आने के बाद उन पर सरकार गिराने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगा। वर्ष 2005 में उन्हें इन्हीं आरोपों के चलते कांग्रेस ने निलंबित किया।

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उन पर अंतागढ़ उपचुनाव में भी कांग्रेस प्रत्याशी मंतूराम पवार की नाम वापसी को लेकर सौदेबाजी के आरोप लगे। बाद में उनका ऑडियो वायरल हो गया। इस पर जोगी के बेटे अमित जोगी को निष्कासित किया गया। इससे अजीत जोगी खुद को उपेक्षित और पार्टी में अलग-थलग पड़ गए। बाद में उन्होंने छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस जोगी का गठन किया और कांग्रेस से दूरी बना ली थी।