नई दिल्ली। पूरा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है। इस महामारी को रोकने के लिए देश में लॉकडाउन (Lockdown) लागू जारी किया गया है। इसके बावजूद कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। वहीं, स्वास्थ्य मंत्रालय ( Health Ministry ) ने COVID-19 मरीजों के इलाज के लिए क्लीनिकल मैनेजेमेंट प्रोटोकॉल ( Protocol ) में कुछ संशोधन किया है। नए प्रोटोकाल को मीडियम और गंभीर कोरोना मरीजों पर फिलहाल इस्तेमाल किया जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने डेक्‍सामेथासन स्‍टीरॉयड को दी मंजूरी

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, COVID-19 के गंभीर मरीज को ऑक्‍सीजन की जरूरत होने पर मीथाइलप्रीडनीसोलॉन (Methylprednisolone) के बजाय अब डेक्‍सामेथासन स्‍टीरॉयड (Dexamethasone steroid) दिया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्रालयय ने इसके लिए संशोधित क्‍लीनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल भी जारी कर दिया है। मंत्रालय ने कहा कि नवीनतम उपलब्ध साक्ष्य और विशेषज्ञ परामर्श से चर्चा करने के बाद यह बदलाव किया गया है। यहां आपको बता दें कि डेक्सामेथासोन का इस्तेमाल पहले से ही फेफड़ों में संक्रमण के इलाज के लिए उपयोग किया जाता रहा है।

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डेक्सामेथासन की खूबियां

रिपोर्ट के मुताबिक, डेक्सामेथासन कोरोना मरीजों में सूजन बढ़ने की प्रक्रिया को धीमी करने में असरदार पाई गई है। इसका इस्‍तेमाल कैंसर के इलाज में भी किया जाता है। डेक्‍सामेथासन स्‍टीरॉयड (Dexamethasone steroid) दवा वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की आवश्‍यक दवाओं की सूची में 1977 से लिस्टेड है। हालांकि, अभी तक इस दवा पर किसी का पेटेंट नहीं है। इतना ही नहीं ये दवा काफी सस्ती और आसानी से बाजार में उपलब्ध है।

WHO ने डेक्‍सामेथासन दवा के उत्‍पादन में तेजी लेन को कहा

इधर, WHO ने डेक्‍सामेथासन दवा के उत्‍पादन में तेजी लाने के लिए कहा है। गौरतलब है कि हाल ही में ब्रिटेन के विशेषज्ञों ने दावा किया है कि डेक्सामेथासन कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में फायदेमंद साबित हो रहा है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक टीम ने 2,000 मरीजों को यह दवा दी थी। तुलनात्मक अध्ययन उन 4,000 हजार मरीजों से किया, जिन्हें यह दवा नहीं दी गई थी। वेंटिलेटर पर रखे गए मरीजों में इस दवा के असर से 40 से 28 फीसदी तक मरने का जोखिम कम हो गया, जबकि जो मरीज ऑक्सीजन पर थे उनमें जोखिम 25 से 20 फीसदी तक कम हो गया था। लिहाजा, सरकार ने अब इस दवा की मंजूरी दे दी है।

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