नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर भारत-चीन ( India China Tension ) के बीच ताजा टकराव से उत्पन्न तनाव को कम करने के लिए बुधवार को फिर बातचीत होगी। भारतीय सेना के सूत्रों ने कहा कि सुबह 10 बजे चुशूल/मोल्डो में दोनों देशों के ब्रिगेड कमांडर तनाव कम करने के उपायों पर चर्चा करेंगे। इससे पहले सोमवार और मंगलवार को भी दोनों पक्षों में लंबी बैठक चली, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका।

भारतीय सेना ने सोमवार को कहा था कि चीनी सेना ने 29 और 30 अगस्त की दरम्यानी रात पूर्वी लद्दाख में उकसावे की कार्रवाई करते हुए पैंगोंग झील के दक्षिण में एकतरफा तरीके से यथास्थिति बदलने की कोशिश की। लेकिन भारतीय सैनिकों ने उसे नाकाम कर दिया। ( India China Tension ) दोनों पक्षों ने सोमवार को करीब छह घंटे तक बातचीत की, लेकिन उसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। इसके बाद मंगलवार को भी प्रयास नाकाम रहा।

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चीन ने 3 दिन में 3 बार उकसाने वाली कार्रवाई की

29-30 अगस्त की रात के बाद 31 अगस्त को भी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर उकसाने वाली कार्रवाई की। अगले दिन यानी 1 सितंबर को फिर खबर आई कि चीन के सैनिकों ने चुनार इलाके में घुसपैठ की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेना ने फिर खदेड़ दिया।

इस बीच सूत्रों ने कहा कि वायु सेना को पूर्वी लद्दाख में एलएसी के पास चीन की बढ़ती हवाई गतिविधियों की निगरानी बढ़ाने के लिए भी कहा गया है। ऐसी खबरें हैं कि चीन ने होतन एयरबेस में लंबी दूरी की क्षमता वाले जे-20 युद्धक विमान और अन्य साजोसामान तैनात किए हैं। यह बेस पूर्वी लद्दाख से करीब 310 किलोमीटर दूर है।

चीन की कोशिश के बाद भारतीय सेना ने झील के आसपास कई सामरिक स्थानों पर अपनी उपस्थिति बढ़ा दी है। इसके अलावा क्षेत्र में भी अपनी उपस्थिति को और अधिक बढ़ा दिया है। क्षेत्र में विशेष सीमा बल की एक बटालियन भी तैनात की गई थी। समझा जाता है कि थल सेनाध्यक्ष जनरल एम एम नरवणे ने सेना मुख्यालय में एक उच्च-स्तरीय बैठक में पूर्वी लद्दाख की समग्र स्थिति की समीक्षा की।

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