टीआरपी डेस्क। कोरोना महामारी से उबरने का दावा करने वाले चीन में अब दूसरी महामारी फैल गई है। यह महामारी है- ब्यूबोनिक प्लेग ( bubonic plague )। मीडिया खबरों के मुताबिक चीन के यून्नान प्रांत के मेंघाई काउंटी का रहनेवाला एक तीन साल का बच्चा प्लेग की चपेट में आ गया है। पिछले हफ्ते ही वहां प्लेग फैलने की खबर आई थी, लेकिन रविवार को इसकी पुष्टि हुई। अब चीन के दक्षिणी-पश्चिमी हिस्से में आपातकाल लगा दिया गया है।

चीनी प्रशासन ने चौथे स्तर का आपातकाल घोषित किया

इससे पहले यून्नान में प्लेग से संक्रमित तीन चूहे भी मरे हुए मिले थे। मीडिया खबरों के मुताबिक बच्चे की हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन यह महामारी विकराल रूप न ले, इसके लिए चीनी प्रशासन ने चौथे स्तर का आपातकाल घोषित कर दिया है। 

चूहों में बीमारी के प्रसार की सूचना जारी

चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक मेंघाई के शिडिंग गांव में चूहों में बीमारी के प्रसार की सूचना जारी की गई है। दो महीने पहले उत्तरी मंगोलिया में भी प्लेग के कई मामले सामने आए थे, जिसके बाद देशभर में तीसरे स्तर की चेतावनी जारी कर दी थी। मंगोलिया में प्लेग के 22 संदिग्ध मामले सामने आए थे, जिनमें से छह की पुष्टि हुई थी। 

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140 से ज्यादा लोगों की जांच की गई थी

मालूम हो कि जुलाई में खोव्द प्रांत में ब्यूबोनिक प्लेग के दो अन्य मामले दर्ज किए गए थे, जिसके बाद 140 से ज्यादा लोगों की जांच की गई थी। उस समय आई खबरों के मुताबिक, एक चरवाहा चीन के उत्तरी आंतरिक मंगोलिया क्षेत्र में इस बीमारी के संपर्क में आ गया था। इसके बाद प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर जानवरों का शिकार नहीं करने और उनका मांस नहीं खाने की अपील की थी। 

ब्यूबोनिक प्लेग को ‘ब्लैक डेथ’ यानी काली मौत भी कहा जाता है

ब्यूबोनिक प्लेग को ‘ब्लैक डेथ’ ( Black Death ) यानी काली मौत भी कहते हैं। यह बहुत पुरानी महामारी है। इसकी वजह से करोड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। यह महामारी अबतक तीन बार व्यापक स्तर पर लोगों को अपना शिकार बना चुकी है। इसकी चपेट में आने से पहली बार लगभग पांच करोड़ लोग, दूसरी बार यूरोप की एक तिहाई आबादी और तीसरी बार लगभग 80 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। 

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कैसे होती है यह बीमारी? 

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बीमारी जंगली चूहों में पाए जाने वाली बैक्टीरिया से होती है। बीमारी जंगली चूहों को होती है और फिर उसके मरने के बाद प्लेग के बैक्टीरिया पिस्सुओं के जरिए मानव शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इन पिस्सुओं के काटने पर संक्रमण वाले बैक्टीरिया व्यक्ति के ब्लड में मिल जाते हैं और व्यक्ति प्लेग से संक्रमित हो जाता है। 

बैक्टीरिया का नाम यर्सिनिया पेस्टिस बैक्टीरियम है

ब्यूबोनिक प्लेग फैलाने वाले बैक्टीरिया का नाम यर्सिनिया पेस्टिस बैक्टीरियम ( Yersinia pestis Bacterium ) है। यह शरीर के लिंफ नोड्स (लसीका ग्रंथियां), खून और फेफड़ों पर हमला करता है। वैसे तो यह पुरानी महामारी है, लेकिन आज भी इसके मामले सामने आते रहते हैं, जैसा कि अभी चीन और मंगोलिया में हुआ। साल 1994 में भारत में भी ब्यूबोनिक प्लेग के करीब 700 मामले सामने आए थे, जिनमें से 52 लोगों की मौत हो गई थी। 

ब्यूबोनिक प्लेग के लक्षण ( Bubonic plague Symptoms ) 

व्यक्ति को तेज बुखार और शरीर में असहनीय दर्द होता है।
नाड़ी तेज चलने लगती है।
नाक और उंगलियां भी काली पड़ने लगती हैं और सड़ने लगती हैं। 
दो-तीन दिन में शरीर में गिल्टियां निकलने लगती हैं, जो 14 दिन में पक जाती हैं। 
गिल्टियां निकलने की वजह से इस बीमारी को गिल्टीवाला प्लेग भी कहते हैं। 

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बताया जाता है कि कि छठी और आठवीं शताब्दी में इस बीमारी को ‘प्लेग ऑफ जस्टिनियन‘ ( Plague of Justinian ) नाम से जाना जाता था। तब करीब ढाई से पांच करोड़ लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद साल 1347 में जब ब्यूबोनिक प्लेग से यूरोप की एक तिहाई आबादी की मौत हो गई थी तो इसे ‘ब्लैक डेथ’ नाम दिया गया था। प्लेग की वैक्सीन बनाने के लिए वैज्ञानिक प्रयासरत हैं, लेकिन अबतक इसी वैक्सीन उपलब्ध नहीं हो पाई है। 

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