टीआरपी डेस्क। केंद्र सरकार ने डिजिटल मीडिया को मान्यता देते हुए उसके नियमन की राह खोल दी। अब न्यूज वेबसाइट भी सरकारी विज्ञापन ले सकेंगी। सरकार ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तर्ज पर डिजिटल न्यूज प्लेटफार्म को खबरों में अनुशासन के लिए स्व-नियमन संस्था बनाने की अनुमति दे दी है। साथ ही डिजिटल न्यूज मीडिया में 26 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का तरीका स्पष्ट कर दिया है।

डिजिटल मीडिया को भी प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक जैसी सुविधाएं मिलेगी

केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि 18 सितंबर, 2019 में केंद्र की तरफ से डिजिटल न्यूज मीडिया को 26 फीसदी एफडीआई की इजाजत दी गई थी। इसको ध्यान में रखकर डिजिटल प्लेटफार्मों को प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को मिलने वाली सुविधाएं देने का फैसला हुआ है। इसके तहत डिजिटल न्यूज प्लेटफार्म भी सरकारी विज्ञापन ले सकेंगे। उनके कर्मचारियों को पीआईबी मान्यता मिलेगी। न्यूज वेबसाइट के कर्मचारी भी प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कर्मचारियों को मिलने वाली सरकारी सुविधाएं ले सकेंगे।

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मंत्रालय ने कहा कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तरह ही डिजिटल मीडिया भी स्व-नियमन संस्थान गठित कर पाएगा, ताकि भविष्य में सरकार के सामने उनका आधिकारिक पक्ष पेश किया जा सके।

अधिकतम 26 फीसदी एफडीआई की इजाजत

केंद्र सरकार ने डिजिटल न्यूज मीडिया में एफडीआई की अपनी नीति को भी स्पष्ट कर दिया। केंद्रीय उद्योग व आंतरिक व्यापार विकास विभाग के निदेशक (एफडीआई) निखिल कुमार कनोडिया की तरफ से जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि किसी भी डिजिटल न्यूज प्लेटफार्म को अधिकतम 26 फीसदी एफडीआई लेने की ही अनुमति मिलेगी और इन प्लेटफार्म की कंपनियां भारत में ही पंजीकृत होनी चाहिए।

कंपनियों को भी 26 फीसदी एफडीआई के दायरे का पालन करना होगा

पहले से संचालित न्यूज एग्रीगेटर्स, डिजिटल मीडिया कंपनियों को जानकारी सप्लाई करने वाली न्यूज एजेंसियां और सभी तरह की खबरें या ताजा समाचार वेबसाइट पर अपलोड करने वाली कंपनियों को भी 26 फीसदी एफडीआई के दायरे का पालन करना होगा। इन कंपनियों को अपने पास मौजूद एफडीआई को 26 फीसदी के स्तर पर लाकर एक साल के अंदर केंद्र सरकार से मंजूरी लेनी होगी। एफडीआई नियमों के पालन की जिम्मेदारी निवेश करने वाली कंपनी की होगी।

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एफडीआई के लिए यह भी अनिवार्य

इसके अलावा कंपनी के बोर्ड में अधिकतर निदेशक और उसका सीईओ भारतीय नागरिक होना चाहिए। कंपनी को ऐसे सभी विदेशी कर्मचारियों के लिए सरकार से सुरक्षा अनुमति लेनी होगी, जिन्हें साल में 60 दिन से ज्यादा के लिए अपने साथ जोड़ा गया है। यह नियम सलाहकार, अनुबंधित, नियुक्ति या अन्य किसी भी तरह के जुड़ाव के लिए लागू होगा। 

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