नई दिल्ली। (India China Military talk) पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा ( Line of Actual Control ) पर जारी तनाव को लेकर आठवें दौर की बैठक में दोनों देशों के सैन्य कमांडरों की बैठक में कोई फैसला नहीं हो पाया।

शुक्रवार को भारतीय क्षेत्र चुशूल में आरंभ हुई बैठक में भारत की तरफ से अपने पुराने स्टैंड को दोहराया गया, जिसमें एलएसी पर मई से पूर्व की स्थिति को बहाल करना है। भारत की तरफ से पहली बार बैठक का नेतृत्व 14वीं कार्प के नए कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन ने किया।

इससे पहले लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने सात दौर की बैठकों का नेतृत्व किया था। लेकिन 14वीं कार्प में उनका कार्यकाल पूरा हो गया है। जबकि चीन की तरफ से मेजर जनरल लियू लिन बैठक का नेतृत्व कर रहे हैं। दोनों तरफ से पिछली बैठकों की भांति विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी मौजूद हैं। आज यानी शनिवार को बैठक को लेकर दोनों देश संयुक्त बयान जारी कर सकते हैं।

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पांच बिन्दुओं पर बनी थी सहमति

बता दें कि पिछली बैठकों में विदेश मंत्रियों के बीच मास्को में तय हुए पांच बिन्दुओं पर आगे बढ़ने पर सहमति बनी है। लेकिन इन मुद्दों को जमीन पर उतारने को लेकर अभी तक गतिरोध बना हुआ है। इनमें सबसे पहले दोनों देशों को अपनी सेनाएं पीछे हटानी है।

सूत्रों की मानें तो इस बैठक के दौरान भारत ने स्पष्ट किया है कि मई से पूर्व की स्थिति चीन बहाल करे और उसी अनुरूप भारत भी कार्रवाई करेगा। खबर है कि चीन भारत पर दबाव डाल रहा है कि वह पहले ऊंची पहाड़ियों से पीछे हटे।

दरअसल, भारत ने पिछले दिनों कई ऊंची पहाड़ियों पर मोर्चा संभालकर चीन पर बढ़त हासिल कर ली थी। इससे चीनी सेना बौखलाई हुई है। दोनों देशों ने 50-50 हजार सैनिकों का जमावड़ा एलएसी के करीब कर रखा है।

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