टीआरपी डेस्क। भारत (India) में नए साल (New Year 2021) पर लगभग 60,000 नवजातों (New Born) के जन्म लेने की संभावना है। भारत में साल के पहले दिन बच्चों के जन्म लेने की ये संख्या दुनिया भर में इस साल ज्यादा होगी। हालांकि पिछले साल के आंकड़ों के मुताबिक, 2020 के पहले दिन जन्मे बच्चों की संख्या की तुलना में 2021 में जन्म लेने वालों की संख्या लगभग 7,390 की कमी होगी।

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (Unicef) द्वारा अनुमान लगाया गया है कि चीन में इस साल 1 जनवरी को भारत के आधे से अधिक यानी 35,615 बच्चे जन्म लेंगे। यूनिसेफ के मुताबिक, तकरीबन 371,504 बच्चे साल 2021 के पहले दिन यानी 1 जनवरी को दुनिया भर में पैदा होंगे। इनमें से 52 फीसदी जन्म सिर्फ 10 देशों में होंगे। इस साल दुनिया भर में 84 साल की औसत आयु तक जीने वाले कुल 1 करोड़ 40 लाख बच्चों के पैदा होने की संभावना है।

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अलग दुनिया में प्रवेश करेंगे 2021 में जन्म लेने वाले शिशु

यूनिसेफ के कार्यकारी निदेशक हेनरीटा फोर ने कहा, ‘आज (1January) जन्म लेने वाले बच्चे एक साल पहले की तुलना में बेहद अलग दुनिया में प्रवेश करेंगे। आज जैसा कि दुनिया वैश्विक महामारी, आर्थिक मंदी, बढ़ती गरीबी और गहरी असमानता का सामना कर रही है। ऐसे में यूनिसेफ के काम की जरूरत हमेशा की तरह ही महान है’। मालूम हो कि इस वर्ष संगठन की 75वीं वर्षगांठ का आयोजन होगा। इस वर्ष पैदा होने वाले बच्चों की संख्या दुनिया भर में कोरोनोवायरस (Covid-19) से मरने वालों की संख्या की तुलना में लगभग 78 गुना होगी।

शिशुओं की औसत जीवन आयु 80.9 वर्ष

भारत में 2021 में जन्म लेने वाले शिशुओं का जीवन 80.9 वर्ष का होगा, जो वैश्विक औसत आयु से तीन वर्ष कम होगा। हालांकि सरकार द्वारा विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयों (SNCU) की स्थापना के हस्तक्षेप के कारण भारत में हर दिन अतिरिक्त 1,000 बच्चे जीवित रहते हैं। 2014 और 2020 के बीच सरकार द्वारा स्थापित 320 जिला स्तरीय एसएनसीयू की वजह से हर साल विशेष जरूरतों वाले एक लाख नवजात जीवित बचे रहते हैं।

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