टीआरपी डेस्क। भारत में हर साल 30 जनवरी को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। आज ही के दिन यानि 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी की गोली मारकर हत्‍या कर दी थी। बापू की पुण्यतिथि को हर साल शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन देश पर शहीद होने वाले वीरों को याद किया जाता है।

मोहनदास करमचंद गांधी की जीवन यात्रा

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। महात्मा गांधी का असली नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। बापू ने साल 1887 में राजकोट हाई स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास किया। फिर आगे की पढ़ाई 4 सितम्बर 1888 को इंग्लैण्ड के लिये रवाना हुए। महात्मा गाँधी ने लंदन में लंदन वेजीटेरियन सोसायटी की सदस्यता ग्रहण की और उसके सदस्य बन गये। उसके बाद बापू लंदन वेजीटेरियन सोसाइटी के सम्मेलनों में भाग लेने लगे और पत्रिका में लेख लिखने लगे। यहां 3 सालों तक रहकर अपनी बैरिस्टरी की पढ़ाई पूरी की और सन् 1891 में वापस भारत आ गए।

आजादी के लिए किया संघर्ष

राष्ट्रपिता ने अछूतों का उद्धार किया। उन्हें ‘हरिजन’ नाम दिया। भाषा, जाति और धर्म संबंधी भेदों को समाप्त करने का आजीवन प्रयत्न किया। स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग पर जोर दिया। सूत कातने, सब धर्मों को आदर से देखने और सत्य, अहिंसा को जीवन में अपनाने की शिक्षा दी। राष्ट्रपिता ने विश्व को शांति का संदेश दिया। बापू सत्य और अहिंसा की राह पर चलने में विश्वास रखते थे। जिसका अनुसरण उन्होंने आजीवन किया।

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मोहनदास करमचंद गाँधी ने अंग्रेजों के विरोध सत्याग्रह को अपना प्रमुख अस्त्र बनाया। सत्य, अहिंसा रूपी अस्त्रों के सामने अंग्रेजों की कुटिल नीति तथा अमानवीय व्यवहार के विरुद्ध बापू ने सत्याग्रह आंदोलन आरंभ किया। असहयोग आंदोलन एवं सविनय अवज्ञा आंदोलन का नेतृत्व किया। राष्ट्रपिता के उच्चादर्शों एवं सत्य के सम्मुख अंग्रज़ो को झुकना पड़ा और भारत छोड़ कर चले गए। इस प्रकार हमारा देश 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हो गया।

राष्ट्रपिता के सिद्धांत और विचार

  • भूल करने में पाप तो है ही, परन्तु उसे छुपाने में उससे भी बड़ा पाप है।
  • जब तक गलती करने की स्वतंत्रता ना हो तब तक स्वतंत्रता का कोई अर्थ नहीं है।
  • काम की अधिकता नहीं, अनियमितता आदमी को मार डालती है।
  • कुछ लोग सफलता के सपने देखते हैं जबकि अन्य व्यक्ति जागते हैं और कड़ी
    मेहनत करते हैं।
  • किसी भी देश की संस्कृति उसके लोगों के ह्रदय और आत्मा में बसती है।
  • आँख के बदले में आँख, पूरे विश्व को अँधा बना देगी।
  • जो समय की बचत करते हैं, वह धन की बचत करते हैं और बचाया हुआ धन, कमाएं
    हुए धन के बराबर है।
  • आचरण रहित विचार, कितने भी अच्छे क्यों न हो, उन्हें खोटे-मोती की तरह
    समझना चाहिए।
  • हमें सदा यह ध्यान रखना चाहिए कि शक्तिशाली से शक्तिशाली मनुष्य भी एक
    दिन कमजोर होता है।
  • क्रोध एक प्रकार का क्षणिक पागलपन
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केंद्र सरकार का आदेश, ‘हर साल 11 बजे दो मिनट का मौन’

हर साल इस दिन राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और तीनों सेना के प्रमुख राजघाट स्थित महात्मा गांधी की समाधि पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं। साथ ही सेना के जवान इस मौके पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देते हुए उनके सम्मान में अपने हथियार को नीचे छुकाते हैं। इस मौके पर पूरे देश में महात्मा गांधी समेत अन्य शहीदों की याद में दो मिनट का मौन रखा जाता है।

परन्तु इस बार केंद्र सरकार ने 30 जनवरी को लेकर आदेश जारी किया है कि हर बार की तरह इस बार भी शहीद दिवस मनाया जायेगा। साथ ही सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश जारी किया गया है। जिसमें देश की आजादी में बलिदान देने वालों की याद में दो मिनट का मौन रखने को कहा गया है। साथ ही इस दौरान कामकाज और आवाजाही पर भी रोक रहेगी।

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शहीद दिवस के लिए जो आदेश गृह मंत्रालय की तरफ से जारी हुआ है। उसमें कहा गया है कि 30 जनवरी को हर साल 11 बजे दो मिनट का मौन रखा जाएगा। इसके साथ-साथ पूरे देश में उन दो मिनट के लिए कोई कामकाज या आवाजाही नहीं हुआ करेगी।

आगे लिखा गया है कि जिन जगहों पर सायरन की व्यवस्था है वहां मौन का याद दिलाने के लिए सायरन बजाया जाएगा। कहीं-कहीं इसके बारे में आर्मी गन से फायर करके भी बताया जाएगा। यह अलर्ट 10.59 पर किया जाया करेगा। इसके बाद सभी को 2 मिनट के लिए मौन रहना है।

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