रायगढ़ जिले में उद्योग लगाने की मची है होड़, पर्यावरण प्रेमी कर रहे हैं विरोध
रायगढ़ जिले में उद्योग लगाने की मची है होड़, पर्यावरण प्रेमी कर रहे हैं विरोध

रायगढ़। रायगढ़ जिले में इन दिनों उद्योग लगाने की होड़ सी मची हुई है। यहां एक के बाद एक उद्योग स्थापित करने के लिए पर्यावरण जन सुनवाई का आयोजन चल रहा है। पर्यावरण और विस्थापन की चिंता करने वाले जन संगठन इसका विरोध कर रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि जन सुनवाई में एन जी टी द्वारा बनाए गए नियमों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। इसलिए ऐसी सुनवाईयों को निरस्त कर देना चाहिए।

छत्तीसगढ़ में कोरबा के बाद रायगढ़ ऐसा जिला है जहां कोयले और पानी की उपलब्धता है। यही वजह है कि यहां कोयले की खदान और उद्योग स्थापित करने के लिए होड़ सी मच गई है। बीते जनवरी से रायगढ़ जिले में शुरू हुई पर्यावरणीय जनसुनवाई बारी बारी से अप्रैल महीने तक चलेगी। इनमें कोयला खदान, पावर प्लांट और स्पंज आयरन के कारखाने शामिल हैं।

क्यों होती है पर्यावरणीय जनसुनवाई..?

कोई भी उद्योग अथवा कोयला खदान शुरू करने से पहले संबंधित इलाके में होने वाले पर्यावरणीय प्रभाव के लिए जन सुनवाई की जाती है , जिसके लिए संबंधित उद्योग अथवा खदान के प्रबंधन द्वारा इलाके के पर्यावरण पर संभावित प्रभाव की रिपोर्ट (ईआईए) प्रस्तुत की जाती है। इसके आधार पर उद्योग के समर्थन या विरोध में यहां के नागरिक अपनी बात कहते हैं। लोक सुनवाई होने के बाद ही किसी भी खदान या कारखाने को शुरू करने की अनुमति दी जा सकती है।

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एक ही तरह की होती है ईआइए रिपोर्ट


रायगढ़ जिले में प्रस्तावित उद्योगों का विरोध करने वाले संगठनों का आरोप है कि कारखानों के लिए जो भी ईआइए रिपोर्ट लगाई जा रही है वह एक ही तरह की होती हैं, ऐसा लगता है कि पुरानी रिपोर्ट को कॉपी करके पेस्ट कर दिया गया है। ताजा मामला 5 मार्च का है जब एन आर स्टील एंड फेरो प्रा लि की स्थापना के लिए पर्यावरणीय जनसुनवाई का आयोजन रायगढ़ के तराईमाल स्थित बंजारी मंदिर परिसर में किया गया। इसके विरोध में लिखित में आपत्ति दर्ज कराने वाले संगठन जन चेतना के संयोजक राजेश त्रिपाठी का आरोप है कि इस सुनवाई में जो ईआइए रिपोर्ट लगाई गई है वह 5 – 6 साल पुरानी है। पूर्व में किसी दूसरी कंपनी द्वारा जो रिपोर्ट लगाई गई थी उसी की कॉपी करके उसे लगा दिया गया है। नियम के मुताबिक ईआईए रिपोर्ट 3 साल से ज्यादा पुरानी नहीं होनी चाहिए मगर यह रिपोर्ट काफी पुरानी है और इसका कोई औचित्य नहीं है। इसके अलावा केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक कंपनी की यह सुनवाई एक साल पहले हो जानी थी, मगर इसमें काफी विलंब किया गया है।

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रिपोर्ट में जंगलविहीन बता दिया गया इलाके को, जबकि “रेड जोन” में है रायगढ़ जिला

एन आर स्टील एंड फेरो प्रा लि के लिए प्रस्तुत ईआईए रिपोर्ट में पूंजीपथरा के उद्योग विस्तार क्षेत्र को जंगल विहीन बताया गया है, जबकि यह पूरी तरह से घने जंगल वाला हाथी प्रभावित क्षेत्र है। वही पर्यावरण की लगातार बिगड़ती हालत को देखकर जब ngt ने जिले को रेड जोन में रखा है तब यहां बिना पर्यावरणीय जांच के नए उद्योगों अथवा पुराने उद्योगों के विस्तार को अनुमति दिए जाने का क्या औचित्य?

प्रायोजित होती है पर्यावरण जनसुनवाई

रायगढ़ जिले में एकता परिषद संगठन के प्रतिनिधि रघुवीर प्रधान बताते हैं कि उन्होंने ऐसी पर्यावरणीय सुनवाई में जाना छोड़ दिया है, इसकी बजाय वे पर्यावरण संरक्षण मंडल के कार्यालय में ही अपनी लिखित आपत्ति दर्ज करा देते हैं। उनके मुताबिक रायगढ़ जिले में अधिकांश लोक सुनवाई एक ही स्थल पर हो रही है, वहीं पर्यावरणीय सुनवाई में किराए के लोगों को बिठा दिया जाता है जो प्लांट के समर्थन में अपनी बात कहते हैं। यहां प्रभावित इलाके के ग्रामीणों की बजाय मजदूर ज्यादा नजर आते हैं।

और कितने खुलेंगे उद्योग एवं खदान?

रायगढ़ जिले में एक के बाद एक कई लोक सुनवाई हो रही है। यहां 25 जनवरी के बाद 3 फरवरी ,5 फरवरी ,3 मार्च ,5 मार्च, 10 मार्च , 12 मार्च और अगले महीने 7 अप्रैल को भी एक लोक सुनवाई है। बता दें कि रायगढ़ जिले में 171 छोटे-बड़े उद्योग हैं और 10 कोयला खदान हैं। खदान और उद्योगों के चलते यहां का पर्यावरण वैसे भी प्रदूषित हो चुका है इसके बाद भी यहां अनेक बिजली और स्पंज आयरन के कारखाने प्रस्तावित है, वहीं कोयला खदानों का भी विस्तार किया जा रहा है।
जनसुनवाईको लेकर की जा रही आपत्तियों के संबंध में यहां के पर्यावरण संरक्षण अधिकारी एस के वर्मा से बातचीत का प्रयास किया गया, मगर उनसे संपर्क नहीं हो सका। बहरहाल जिस तरह से रायगढ़ जिले में इन दिनों प्राथमिकता के आधार पर जन सुनवाईयां चल रहीं हैं, उससे ऐसा लगता है कि जल्द ही इन उद्योगों को प्रारंभ करने की अनुमति भी दे दी जाएगी। हालांकि यहां के जन संगठन इन प्रस्तावित उद्योगों के खिलाफ एनजीटी में जाने की तैयारी भी कर रहे हैं, देखना है कि इसके क्या परिणाम सामने आते हैं।

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