होलिका दहन
छत्तीसगढ़ के इस गांव में 35 सालों से नहीं मनाया गया होलिका दहन

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के गोंडपेंड्री गांव में पिछले कई सालों से होलिका दहन नहीं मनाया जा रहा है। गोंडपेंड्री गांव में कभी होली को लेकर उत्साह रहा करता था, लेकिन एक हादसे ने यहां उमंग और उत्साह दोनों छीन लिया। दरअसल, 35 साल पहले यहां आपसी रंजिश के चलते होलिका में एक युवक को जिंदा जलाने की कोशिश की गई थी। इसके बाद गांव वालों ने तय किया कि अब गांव में होलिका दहन नहीं किया जाएगा।

एक युवक को जिंदा जलाने की कोशिश

बताया जाता है कि करीब 35 साल पहले गांव के दो समुदायों में जमकर खूनी संघर्ष हुआ। होलिका दहन के दिन एक युवक को जिंदा जलाने की कोशिश की गई। उस दिन से गांव के बुजुर्गों ने तय किया कि अब गांव में होलिका नहीं जलाई जाएगी। कई बार गांव के युवकों ने होलिका दहन करने की परंपरा दोबारा शुरु करने की कोशिश की। लेकिन, गांव के बुजुर्गों ने जब 35 साल पुराने उस मंजर को याद दिलाया तो दोबारा शुरु करने की हिम्मत किसी की नहीं हो पायी।

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दो समुदायों के बीच जमकर हुआ था विवाद

ग्रामीण धनुषराम यदु बताते हैं कि पहले इस गांव में बड़े ही धूमधाम से होली का पर्व मनाया जाता था। लेकिन 35 साल पहले दो समुदायों के बीच जमकर विवाद हुआ। मामला कोर्ट तक पहुंच गया था। उसके बाद से गांव वालों ने होलिका दहन करना ही बंद कर दिया। गांव के छोटे बच्चे आपस में ही रंग गुलाल लगाकर होली खेल लेते हैं। लेकिन किसी प्रकार का उत्सव नहीं मनाया जाता हैं।

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