कोरोना को दैवी -आपदा माने सरकार
कोरोना को दैवी -आपदा माने सरकार

कोरोना को दैवी -आपदा माने सरकार
कोरोना को दैवी -आपदा माने सरकार
   - श्याम वेताल -

केंद्र सरकार का नारा है ‘कोरोना हारेगा , देश जीतेगा‘। पहली लहर के दौरान यह नारा कुछ हद तक सही साबित हुआ लेकिन, मौज़ूदा दूसरी लहर में यह कोरोना के पक्ष में जाता दिख रहा है। कोरोना किसी मदान्ध हाथी की तरह हज़ारों परिवारों को कुचलते हुए आगे ही बढ़ता जा रहा है। न डाक्टरों का बस चल रहा है और न सरकार के करते कुछ बन रहा है। बड़े पैमाने पर लोगों की जान जा रही है। कोरोना की विजय – यात्रा पिछले 25 दिनों से अनवरत आगे बढ़ रही है। महामारी की विकरालता पर क़ाबू पाने के सारे उपाय निष्फल होते जा रहे हैं। अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी ने तो सरकार के हाथ – पांव ही ठंडे कर दिए हैं। नतीज़ा यह है कि रोज़ बड़ी तादाद में लोग कोरोना के चंगुल में फंस कर अपनी जान खो रहे हैं।

हालात इतने डरावने हो रहे हैं कि किसी को कुछ सूझ ही नहीं रहा है। विशेष रूप से अस्पतालों की स्थिति दयनीय हो गयी है। डॉक्टर अपने सामने मरीज़ों को मरते हुए देख रहें हैं लेकिन, कुछ नहीं कर पा रहें हैं। करेंगे भी तो क्या ….. ? मरीज़ की जान बचाने के लिए इस समय सबसे जरूरी हथियार ‘ऑक्सीजन‘ ही उनके पास नहीं है। देश की राजधानी दिल्ली के सर्व सुविधायुक्त अस्पतालो में ऑक्सीजन की कमी के कारण 25 -25 लोग दम घुंटने से मर रहें हैं।

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यही हाल देश के अन्य कई शहरों में भी है। अस्पतालों ने नये मरीज़ भर्ती करने से मना कर दिया। अस्पतालों के बाहर के दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। घरवाले मरीज़ को लेकर इस आस में बैठें हैं कि, ऑक्सीजन की खेप आते ही अस्पताल में दाखिला मिल जायेगा। कोरोना के जिस मरीज़ को डाक्टर लोग घरवालों से 15 गज़ दूर रखते हैं वही मरीज़ घरवालों की गोद में घंटों पड़ा है। ऐसे में , क्या घरवाले संक्रमित नहीं होंगे ? यह कोई एक .दो मरीज़ों की कहानी नहीं है , हर अस्पताल पर दर्ज़नो ऐसे दृश्य देखे गए हैं। ऐसी स्थिति में संक्रमितों की संख्या नहीं बढ़ेगी ?

यह महा संक्रामक बीमारी अब तक हजारों परिवारों पर कहर बरपा चुकी है। अपनी दूसरी लहर में यह बुज़ुर्गों के साथ जवानों को भी असमय मौत दे रही है। इस कारण कई कच्ची गृहस्थियां उजड़ गयी हैं और कई बुज़ुर्गों का सहारा छिन गया। कई परिवारों का भविष्य अँधेरे में चला गया है। ऐसे परिवारों के लिए क्या संवेदना के दो बोल काफी हैं ? उन परिवारों पर आई विपत्ति में हाथ बंटाने के लिए सरकार को आगे आने की जरूरत नहीं है ? अचानक आयी इस विपत्ति को दैवी – विपदा का दर्ज़ा नहीं दिया जा सकता ? भूकंप आते हैं ,कई लोगों की मौत होती है तो सरकार मृतकों के परिवारों को आर्थिक मदद देती है ,नौकरी देती है। बाढ़ में जान गंवाने वालों के परिवारों को भी ऐसी ही आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। तो यह महामारी सिर्फ बीमारी क्यों ? दैवी -आपदा क्यों नहीं ?

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दैवी – आपदा का यही अर्थ है न , कि जहां मानव का बस न चले। यहाँ तो मानव क्या ,सरकार रूपी महामानव भी बेबस है। ठीक वैसे ही जैसे भूकंप और बाढ़ के समय सरकार ईश्वरीय प्रकोप के आगे नतमस्तक होती है। कोरोना महामारी के आगे भी सरकार ने घुटने टेक दिए हैं। इसलिए अब कोरोना को भी दैवी आपदा मानते हुए वे सारे प्रावधान लागू कर देने चाहिए जो दैवी आपदा के दौरान प्रभावी होते हैं। न्याय यही कहता है , इसलिए केंद्र सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार कर कोरोना पीड़ितों , प्रभावितों के आंसू पोछने का काम करे।

यही एक रास्ता है जिसके जरिये केंद्र सरकार कोरोना की दूसरी लहर की आमद का अंदाज़ा न लगा पाने की अपनी नाकामयाबी का दाग़ कुछ हल्का कर सकती है वरना देश की जनता इस दाग़ को 2024 तक हल्का भी नहीं होने देगी। राज्य सरकारों को भी इस मामले में पहल करनी चाहिए। वे भी उन परिवारों की रोज़ी – रोटी के लिए अपनी झोली से कुछ दे सकते हैं जिन परिवारों की रोटी का सहारा कोरोना ने छीन लिया है।

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