पेगासस का छत्तीसगढ़ कनेक्शन : राज्य के जनवादी कार्यकर्ताओं की हो रही थी जासूसी, आदिवासियों के अधिकारों के लिए करते हैं काम

रायपुर। देशभर में इजराइली सॉफ्टवेयर पेगासस के जरिए फोन हैक कर जासूसी करने का मामला चर्चा में है। जिनकी जासूसी हो रही थी उनके नाम भी धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं। इनमें छत्तीसगढ़ के भी 07 लोगों के नाम शामिल हैं और यह सभी जनवादी और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में जल जंगल और जमीन के लिए संघर्ष करने वालों के रूप में इनकी पहचान छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि देश भर में है।

छत्तीसगढ़ से इन कार्यकर्ताओं के हैं नाम

पेगासस स्पाई वेयर से जिन लोगों की जासूसी हो रही थी, उनमें छत्तीसगढ़ से पहला नाम आलोक शुक्ल का है। उनके अलावा सोनी सोरी, लिंगाराम कोडोपी, डिग्री प्रसाद चौहान, शुभ्रांशु चौधरी, बेला भाटिया तथा शालिनी गेरा के नाम भी शामिल हैं।

व्हाट्स एप्प ने पूर्व में दी थी सूचना

छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजक आलोक शुक्ल पिछले कुछ सालों से हसदेव क्षेत्र को बचाने के लिए अभियान चला रहे हैं। आलोक बताते हैं कि सन् 2019 में उन्हें व्हाट्सएप्प ने सूचना दी थी कि उनका फोन सर्विलांस पर है। इससे पूर्व सन् 2018 में उनके पास मिस्ड वीडियो कॉल भी आते थे। पिछली बार भी उनका नाम जासूसी वालों की सूची में आ चुका है।

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वर्तमान में वे हसदेव क्षेत्र को बचाने के लिए सरकार के साथ ही देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट घराने से लड़ रहे हैं, स्वाभाविक है कि ऐसे काम में जो लोग संघर्षरत हैं, तो उनकी जासूसी तो होगी ही। आलोक का मानना है कि विदेशी कंपनी से जासूसी करवा कर सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरे में डाल रही है।

हम पर दोनों ओर से है नजर : शुभ्रांशु

BBC के पत्रकार रहे शुभ्रांशु चौधरी नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सल हिंसा को रोकने और शांति के प्रयास के लिए जुटे हुए हैं। शुभ्रांशु बताते हैं कि उन पर तो एक तरफ सरकार की नजर है, वहीं दूसरी ओर नक्सलवादी भी उनकी जासूसी करवाते हैं।

उन्होंने भी बताया कि दो साल पहले व्हाट्सएप्प ने सूचना दी थी कि उनका फोन हैक करने की कोशिश हुई है। इससे बचने के लिए उन्होंने प्रशिक्षण लिया हुआ है, और वे अक्सर अपना हैंडसेट बदल देते हैं। शुभ्रांशु ने तो यह भी खुलासा किया कि उनके यहां जो स्टाफ था वह नक्सलियों का जासूस था। हालाँकि इसकी जानकारी होने के बावजूद उन्होंने उस स्टाफ को काम से नहीं निकाला। शुभ्रांशु का मानना है कि अगर उनकी जासूसी हो रही है तो इसके लिए गैरकानूनी तरीका न अपनाया जाये।

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पेगासस के जरिये जासूसी वालों की सूची में सोनी सोरी का नाम है, जो बस्तर की राजनैतिक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और वह पुलिस के दमन के खिलाफ आवाज उठाती रही हैं। लिंगा राम कोडोपी उसके भतीजे हैं, जो उनके साथ ही काम करते हैं। डिग्री प्रसाद चौहान पीयूसीएल से जुड़े हैं और इनका ज्यादातर काम आदिवासियों की जमीन की फर्जी खरीद फरोख्त के विरुद्ध अदालतों में लड़ाई लड़ते रहना है।

पत्रकार शुभ्रांशु चौधरी नक्सली इलाकों में शांति मार्च निकाल चुके हैं। दूरस्थ इलाकों के लोगों की समस्याओं को सामने लाने के लिए काम करते हैं। शालिनी गेरा और बेला भाटिया मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता हैं। छत्तीसगढ़ के आदिवासियों से जुड़े अनेक मामलों को वे शीर्ष अदालतों तक ले गई हैं।

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