जासूसी मामला : पेगासस पर कल फैसला सुनाएगी सुप्रीम कोर्ट, तकनीकी विशेषज्ञों की कमेटी का किया गया था गठन
जासूसी मामला : पेगासस पर कल फैसला सुनाएगी सुप्रीम कोर्ट, तकनीकी विशेषज्ञों की कमेटी का किया गया था गठन

नई दिल्ली। पेगासस जासूसी मामले की जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट कल सुनवाई करेगी। बता दें सुनवाई के दौरान केंद्र ने विशेषज्ञों की एक निष्पक्ष कमिटी बनाने का प्रस्ताव दिया था, जो कोर्ट की निगरानी में काम करेगी। कोर्ट ने संकेत दिया था कि वह अपनी तरफ से कमिटी के गठन करेगा।

जानें मामले में कहां से आई रिपोर्ट

लीक हुए आंकड़ों के आधार पर की गई एक वैश्विक मीडिया संघ की जांच के बाद इस बात के और सबूत मिले हैं कि इजराइल स्थित कंपनी ‘एनएसओ ग्रुप के सैन्य दर्जे के मालवेयर का इस्तेमाल पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और राजनीतिक असंतुष्टों की जासूसी करने के लिए किया जा रहा है।

पत्रकारिता संबंधी पेरिस स्थित गैर-लाभकारी संस्था ‘फॉरबिडन स्टोरीज एवं मानवाधिकार समूह ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा हासिल की गई और 16 समाचार संगठनों के साथ साझा की गई 50,000 से अधिक सेलफोन नंबरों की सूची से पत्रकारों ने 50 देशों में 1,000 से अधिक ऐसे व्यक्तियों की पहचान की है, जिन्हें एनएसओ के ग्राहकों ने संभावित निगरानी के लिए कथित तौर पर चुना।

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वैश्विक मीडिया संघ के सदस्य ‘द वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, जिन लोगों को संभावित निगरानी के लिए चुना गया, उनमें 189 पत्रकार, 600 से अधिक नेता एवं सरकारी अधिकारी, कम से कम 65 व्यावसायिक अधिकारी, 85 मानवाधिकार कार्यकर्ता और कई राष्ट्राध्यक्ष शामिल हैं। ये पत्रकार ‘द एसोसिएटेड प्रेस (एपी), ‘रॉयटर, ‘सीएनएन, ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल, ‘ले मोंदे और ‘द फाइनेंशियल टाइम्स जैसे संगठनों के लिए काम करते हैं। एनएसओ ग्रुप के स्पाइवेयर को मुख्य रूप से पश्चिम एशिया और मैक्सिको में लक्षित निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जाने के आरोप हैं। सऊदी अरब को एनएसओ के ग्राहकों में से एक बताया जाता है। इसके अलावा सूची में फ्रांस, हंगरी, भारत, अजरबैजान, कजाकिस्तान और पाकिस्तान सहित कई देशों के फोन हैं। इस सूची में मैक्सिको के सर्वाधिक फोन नंबर हैं। इसमें मैक्सिको के 15,000 नंबर हैं।

इजरायली कंपनी NSO कहीं ये बात

इजरायली कंपनी एनएसओ ने जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि एमनेस्टी इंटरनेशनल और फॉरबिडेन स्टोरीज का डाटा गुमराह करता है। यह डाटा उन नंबरों का नहीं हो सकता है, जिनकी सरकारों ने निगरानी की है। इसके अलावा एनएसओ अपने ग्राहकों की खुफिया निगरानी गतिविधियों से वाकिफ नहीं है।

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