नई दिल्ली। थोड़ी देर में मोदी कैबिनेट की अहम बैठक होने जा रही है। यह लगभग तय है कि इस बैठक में कृषि क़ानूनों को रद्द करने को मंजूरी दे दी जाएगी। हालांकि सरकार इन्हें रद्द करने का एलान कर चुकी है लेकिन इससे जुड़ी संवैधानिक प्रक्रिया बाक़ी है। किसानों ने भी कहा है कि वे संसद में इन क़ानूनों के रद्द होने पर ही सरकार की बात का भरोसा करेंगे। संसद का शीतकालीन सत्र 29 नवंबर से शुरू होने जा रहा है।

संसद सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाई जाएगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसमें हिस्सा लेंगे। यह बैठक 28 नवंबर को होगी। इसमें कृषि क़ानूनों की वापसी और एमएसपी को लेकर गारंटी क़ानून बनाए जाने पर बातचीत हो सकती है। लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला और राज्यसभा के चेयरमैन एम. वेंकैया नायडू भी सभी राजनीतिक दलों के फ्लोर लीडर्स से मिलेंगे जिससे सत्र के दौरान किसी तरह का शोर-शराबा न हो और कामकाज आराम से चले। बीते संसद सत्र के दौरान कृषि क़ानूनों व पेगासस जासूसी मामले को लेकर खासा हंगामा हुआ था और सदन का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ था। इसलिए सरकार की कोशिश है कि इस बार वैसे हालात न बनें। उस दौरान सदन में हुए लगातार शोर-शराबे और हंगामे को लेकर ओम बिड़ला बेहद नाराज़ हुए थे।

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