Saturday, May 21, 2022
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भूविस्थापितों ने छेरछेरा में मांगा रोजगार, अब गणतंत्र दिवस पर खदान के अंदर अपनी जमीन पर फहराएंगे तिरंगा

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कोरबा। जिले के कुसमुंडा कोयला क्षेत्र के भूविस्थापित किसानों ने आज छत्तीसगढ़ के महापर्व छेराछेरा के दिन अधिग्रहित जमीन के बदले रोजगार देने की मांग पर कुसमुंडा जीएम संजय मिश्रा के कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया और उनके चैम्बर में जाकर छेराछेरा में रोजगार देने की मांग की। इस मौके पर माकपा कार्यकर्ता भी भूविस्थापितों के समर्थन में साथ मे थे।

78 दिन से जारी है धरना-प्रदर्शन

दक्षिण पूर्व कोयला प्रक्षेत्र SECL द्वारा अधिग्रहित जमीन के एवज में रोजगार की मांग को लेकर भूविस्थापित किसान एसईसीएल के कुसमुंडा मुख्यालय के सामने 1 नवंबर से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। इस बीच उन्होंने दो बार खदान को 20 घंटे से भी ज्यादा समय तक बंद रखा और इस दौरान आंदोलनकारियों को प्रशासन द्वारा गिरफ्तार कर जेल भी भेजा जा चुका है। इनका आरोप है कि एसईसीएल प्रबंधन पूर्व में दिए गए किसी भी आश्वासन को मानने के लिए तैयार नहीं है। भूविस्थापित किसानों के इस अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन के 78 दिन पूरे हो चुके हैं।

40 साल बाद भी हल नहीं हुआ रोजगार-पुनर्वास का मसला

भूविस्थापितों ने आज छत्तीसगढ़ के लोकपर्व छेरछेरा के मौके पर SECL प्रबंधन के समक्ष झोली फैलाकर रोजगार की मांग की। इस दौरान आंदोलनकारी SECL कुसमुंडा के जीएम संजय मिश्रा से भी छेरछेरा मांगने गए। इस मौके पर धरनास्थल पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए माकपा जिला सचिव प्रशांत झा ने कहा कि जमीन अधिग्रहण के चालीस साल बाद भी पुनर्वास और रोजगार का मसला हल नहीं हुआ, क्योंकि केंद्र की भाजपा और राज्य की कांग्रेस सरकार दोनों की नीतियां कॉर्पोरेटपरस्त और किसान विरोधी हैं। दोनों सरकारों ने किसानों की जमीन छीनने का लिए एसईसीएल प्रबंधन का साथ दिया है और आज जब भूविस्थापित अपनी जमीन के बदले रोजगार की मांग कर रहे हैं, तो यही सरकारें किसानों के खिलाफ प्रबंधन के पक्ष में खड़े नजर आ रहीं हैं।

रोजगार मिलने तक जारी रहेगा आंदोलन

SECL की कुसमुंडा कोयला परियोजना के समक्ष प्रदर्शन कर रहे भूविस्थापितों के संगठन रोजगार एकता संघ के अध्यक्ष राधेश्याम कश्यप ने बताया कि कुसमुंडा परियोजना के लिए अधिग्रहित गांवो के भूविस्थापित किसान रोजगार के लिए एसईसीएल कार्यालय का चक्कर लगा-लगाकर थक चुके हैं, और अब उनके सब्र का बांध टूट चुका है। भू विस्थापितों के सामने अब संघर्ष के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि रोजगार मिलने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा और इसी कड़ी में 26 जनवरी को कुसमुंडा खदान के अंदर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा, जिसमे बड़ी संख्या में भूविस्थापित किसान और अन्य ग्रामीणजन अपने परिवार के साथ उपस्थित रहेंगे।

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